अनूपपुर जिले में पिछले चार माह में हाथियों के हमले में पांच लोगों की मौत के बाद वन विभाग ने अपनी रणनीति बदल दी है। अब वन मंडल के अधिकारी हाथियों के मूवमेंट पर दिन और रात दोनों समय ड्रोन से नजर रख रहे हैं, ताकि उन्हें रिहायशी इलाकों से दूर रखा जा सके और जनहानि को रोका जा सके। इस नई रणनीति के तहत, वन विभाग के आला अधिकारी अब सीधे फील्ड पर उतर आए हैं। ड्रोन की मदद से हाथियों की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। यदि हाथी किसी संभावित गांव की ओर बढ़ते दिखते हैं, तो ग्रामीणों को सतर्क किया जाता है या हाथियों को जंगल की ओर वापस मोड़ा जाता है। वन मंडलाधिकारी अनूपपुर, डेविड चेन्नाप ने बताया कि यह रणनीति वर्तमान में सफल हो रही है। पिछले दो दिनों में कोई जनहानि की घटना सामने नहीं आई है। वन अधिकारी ड्रोन से हाथियों के लोकेशन को आसानी से ट्रेस कर सुरक्षात्मक प्रबंध कर रहे हैं। रात में भी एक्टिव वन विभाग की टीम
इसी क्रम में, 30 अप्रैल की शाम से 1 मई की सुबह तक एक विशेष नाइट पेट्रोलिंग अभियान चलाया गया। इस सघन अभियान की कमान खुद वन मंडलाधिकारी डेविड चेन्नाप और उप वन मंडलाधिकारी प्रीतेश पखाले ने संभाली थी। दोनों अधिकारी देर रात तक संवेदनशील इलाकों में गश्ती दलों के साथ पैदल और वाहनों से मूवमेंट करते रहे। अधिकारियों की सक्रियता से न केवल गश्ती व्यवस्था को मजबूती मिली, बल्कि प्रतिकूल मौसम और तूफान के बीच तैनात मैदानी स्टाफ का मनोबल भी बढ़ा। वन विभाग इस बार सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। ड्रोन में लगा है नाइट विजन कैमरा ‘नाइट विजन’ (इन्फ्रारेड) ड्रोन के जरिए हाथियों की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है, जिससे उनकी सटीक लोकेशन का पता लगाकर ग्रामीणों को पहले ही अलर्ट किया जा सके।
जैतहरी, राजेन्द्रग्राम, कोतमा और अमरकंटक परिक्षेत्र के अधिकारियों विवेक मिश्रा, शिवम् कोष्टी, हरीश तिवारी और वीरेंद्र श्रीवास्तव ने आपसी तालमेल बनाकर पूरे क्षेत्र को कवर किया। तस्वीरें देखिए… अलर्ट रहेगा जारी
वन विभाग ने ग्रामीणों से रात के समय घर से बाहर न निकलने, हमेशा समूह में चलने, हाथियों से दूरी बनाए रखने, अफवाहों पर ध्यान न देने, और किसी भी हलचल की सूचना वन विभाग को देने की अपील की है। फिलहाल जंगल में वन अधिकारियों को ड्रोन लेकर गश्ती करने से ग्रामीण राहत महसूस कर रहे है। वहीं वन विभाग अलर्ट है।
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