एम्स भोपाल में रीनल डाययूरेटिक स्कैन: कम खर्च में हाइड्रोनेफ्रोसिस के मरीजों की होगी जांच, प्रदेश का अकेला अस्पताल – Bhopal News

एम्स भोपाल में रीनल डाययूरेटिक स्कैन:  कम खर्च में हाइड्रोनेफ्रोसिस के मरीजों की होगी जांच, प्रदेश का अकेला अस्पताल – Bhopal News




भोपाल स्थित एम्स भोपाल में अब किडनी से जुड़ी जटिल बीमारियों की जांच और इलाज और भी सटीक हो गया है। संस्थान के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में रीनल डाययूरेटिक स्कैन तकनीक के जरिए मरीजों को बेहतर और वैज्ञानिक उपचार मिल रहा है। खास बात यह है कि यह सुविधा मध्यप्रदेश के सरकारी संस्थानों में बहुत सीमित है और एम्स भोपाल में यह कम लागत पर उपलब्ध कराई जा रही है। इस तकनीक से किडनी की कार्यक्षमता, अवरोध की स्थिति और ऑपरेशन की आवश्यकता का सटीक आकलन किया जा सकता है। एम्स भोपाल प्रदेश का एकमात्र सरकारी केंद्र है, जहां यह उन्नत जांच सुविधा कम लागत में उपलब्ध है। निजी अस्पतालों में जहां ऐसी जांच महंगी होती है, वहीं यहां आम मरीज भी आसानी से इसका लाभ उठा सकते हैं। रीनल डाययूरेटिक स्कैन इन वजहों से जरूरी न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के अनुसार, रीनल डाययूरेटिक स्कैन एक मॉर्डन जांच तकनीक है, जिससे किडनी की कार्यप्रणाली का विस्तृत रिपोर्ट मिलती है। इस जांच के जरिए यह पता लगाया जाता है कि किडनी कितनी सही तरीके से काम कर रही है और यूरिन का प्रवाह सामान्य है या नहीं। विभागाध्यक्ष डॉ. सुरुचि जैन ने बताया कि हाइड्रोनेफ्रोसिस यानी किडनी की सूजन एक गंभीर समस्या है, जो जन्मजात भी हो सकती है या किडनी स्टोन के कारण विकसित होती है। इस स्थिति में पेल्वीयूरेटरिक जंक्शन में अवरोध आ जाता है, जिससे किडनी प्रभावित होती है। इनको जांच करानी जरूरी अल्ट्रासाउंड से ए़डवांस है यह नई तकनीक डॉक्टरों के मुताबिक, सामान्य अल्ट्रासाउंड शुरुआती जानकारी देता है, लेकिन सही इलाज तय करने के लिए रीनल डाययूरेटिक स्कैन बेहद जरूरी होता है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि मरीज को सर्जरी की जरूरत है या दवाओं से ही इलाज संभव है। यह तकनीक सिर्फ बीमारी की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑपरेशन के बाद भी इसका उपयोग किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि किडनी सही तरीके से काम कर रही है और यूरिन का प्रवाह सामान्य हो गया है।



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