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Balaghat News: पति को शराब सूट नहीं थी फिर भी वह हर रोज शराब पीकर आते थे. इस परिस्थिति में भी दुर्गावती ने अपने बच्चों पर काली दुकान का साया न पड़ने दिया और उन्हें अच्छे रास्ते पर चलने की सलाह दी और नतीजतन उनके बच्चे अब बेहतर जिंदगी जी रहे हैं. ऐसे में लोकल 18 काली दुकान के साये वाली गली से एक ऐसी कहानी लेकर आई है, जो लोगों के लिए प्रेरणा दे सकती है.
Durgavati tekam inspiring story: मध्य प्रदेश के बालाघाट में गांवों से लेकर शहरों तक शराब दुकान का विरोध हो रहा है. इसमें से एक पुराने शहर के बूढ़ी इलाका भी है, जहां पर लगभग चार दशक से भी एक दारू भट्टी है. अब रहवासी 13 अप्रैल से दारू की हटने तक का संकल्प लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. यह इलाका सालों से काली दुकान के साये में रहा, जिसने दर्जनों परिवारों की खुशियां छीन ली. इसी में से एक है दुर्गावती टेकाम, जो इस इलाके में 1986 से रह रही है. समय के साथ बच्चे भी बड़े हो रहे थे और शराब दुकान पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी बढ़ने लगा. पति को शराब सूट नहीं थी फिर भी वह हर रोज शराब पीकर आते थे. इस परिस्थिति में भी दुर्गावती ने अपने बच्चों पर काली दुकान का साया न पड़ने दिया और उन्हें अच्छे रास्ते पर चलने की सलाह दी और नतीजतन उनके बच्चे अब बेहतर जिंदगी जी रहे है. ऐसे में लोकल 18 काली दुकान के साये वाली गली से एक ऐसी कहानी लेकर आई है, जो लोगों के लिए प्रेरणा दे सकती है.
बर्बादी की वजह वाले इलाके में था घर
1986 में दशरथ टेकाम और दुर्गावती टेकाम बालाघाट के बूढ़ी इलाके में किराए के मकान में रहते थे. दुर्गावती के पति दशरथ सिंचाई विभाग में काम करते थे. वहीं, दुर्गावती को भी स्वास्थ्य विभाग में होस्टल सहायक के पद पर नौकरी मिली. परिवार शुरुआत में अच्छा था लेकिन नौकरी कर लौटने के बाद पास की दारू भट्टी से शराब पीते थे. वह ज्यादा शराब नहीं पीते थे लेकिन उन्हें शराब सूट नहीं होती थी. इससे परिवार में अक्सर कलह होती थी. होस्टल में काम करने वाली दुर्गावती शाम होते ही अपनी नौकरी के लिए जाती तो उनके पति घर पर शराब पीकर आते थे. न चाहते हुए भी वह शराब के नशे में बच्चों पर चिल्लाते थे. ऐसे में बच्चों की पढ़ाई पर असर होता था.
पति को सबक सिखाने घर छोड़ा
जब उसी इलाके में उन्होंने उसी इलाके में जमीन खरीद मकान बनाया तो बच्चों ने उन्हें नाराजगी भी जाहिर की थी. वहीं, एक वक्त ऐसा आया कि शराब के नशे में पति के चिल्लाने की आदत से दुर्गावती अपने बच्चों के साथ घर छोड़ किराए के कमरे में चली गई. वह दो महीना ही रही तब पति ने घर बेचने के लिए एक बोर्ड भी लटकाया. ऐसे में घर को बचाने के लिए वह बच्चों के साथ अपने घर लौट आई.
पति की मौत हुई तो बच्चों पढ़ाया
दुर्गावती के पति कम उम्र से ही बीमार पड़ने लगे. जैसे-जैसे बच्चे बड़े हुए तब उनकी शराब की आदत कम होने लगी. लेकिन उनके शरीर ने जवाब देना शुरू कर दिया. वह बीमार रहने लगे और साल 2013 में अपने रिटायरमेंट से दो साल पहले वह दुनिया छोड़ चले गए. तब बच्चे बड़े हो चुके थे. उनका बेटा सागर के एक कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था. पिता का साया उठा तो बेटे ने कड़ी मेहनत की और साल 2016 में एक साथ तीन परीक्षाएं भी पास की. उन्होंने आखिर में पटवारी की नौकरी को चुना.
अब तीन बच्चे सरकारी नौकरी में
उनकी बड़ी बेटी प्रेमलता टेकाम आंगनवाड़ी में काम करती है. वहीं, बेटा राहुल टेकाम पटवारी है. एक सरिता टेकाम कृषि विस्तार अधिकारी है. सबसे छोटी बेटी निधि टेकाम छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में संगीत की पढ़ाई कर रही है. ऐसे में उन्होंने विपरीत परिस्थियों में भी रहकर अपने बच्चों का भविष्य संवारा.
अब हो रही युवा पीढ़ी बर्बाद
दुर्गावती का कहना है कि बीते कुछ सालों में इस इलाके का माहौल बिगड़ता जा रहा है. कम उम्र के बच्चे शराब की लत के शिकार हो चुके हैं. वहीं, कई लोग कम उम्र में ही दुनिया छोड़ रहे हैं. अब इलाके में आए दिन गाली-गलौज, विवाद की स्थिति बन रही है. अगर अब की स्थिति में उनके बच्चे पढ़ रहे होते तो शायद वह इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते. आपको बता दें, 13 अप्रैल से महिलाएं इस इलाके में आंदोलन कर रही है. उन्होंने संकल्प लिया है जब तक उस शराब दुकान को हटाया नहीं जाता, तब वह दुकान के आगे से नहीं हटेगी.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें