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Chinese Kheera Kheti: छतरपुर में किसान देसी खीरा न लगाकर विदेशी वैरायटी का खीरा लगा रहे हैं. इससे उनकी कमाई हो रही है. दरअसल, जिले के किसान चाइनीज खीरा लगाना पसंद कर रहे हैं, क्योंकि इस खीरे की डिमांड बड़े शहरों में सालभर बनी रहती है. आइए जानते हैं इस खीरे की खासियत और उगाने का तरीका…
Chinese Kheera. छतरपुर के किसान रामकेश पटेल ने बताया कि पॉलीहाउस स्ट्रक्चर तैयार करवाया था. लेकिन, ये नहीं समझ आ रहा था कि इसमें कौन सी फसल लगाई जाए. इसके बारे में उद्यानिकी एक्सपर्ट से बात की तो उन्होंने बताया छतरपुर में वैसे तो देसी खीरा, टमाटर, करेला, बैंगन की खेती ज्यादा होती है, लेकिन पॉलीहाउस के लिए चाइनीज खीरा सबसे सही होता है. इसके बाद हमनें चाइनीज खीरा लगाने का फैसला किया. हालांकि, जिले में दूसरे किसान भाइयों ने भी चाइनीज खीरा लगा रखा है.
नीदरलैंड में तैयार होता है बीज
किसान रामकेश बताते हैं कि 2 महीने पहले उन्होंने अपने पॉलीहाउस में रिजवान कंपनी का चाइनीज खीरा लगाया था. ये खीरा लगभग 30 दिनों में फल देने लगता है. इस खीरे का बीज नीदरलैंड की कंपनी बनाती है. इसी बीज से अपने गांव में विदेशी खीरा तैयार किया और अब भोपाल-इंदौर जैसे बड़े शहरों में इसे महंगे दामों में बेच रहे हैं.
स्वाद में मीठा
नौगांव कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थ उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. कमलेश अहिरवार बताते हैं कि चाइनीज खीरा खाने में बहुत मीठा होता है. यह इतना चिकना होता है कि इसे छीलने की जरूरत ही नहीं पड़ती. जहां देसी खीरा बाहर से खुरदुरा और दबे रंग का होता है, वहीं यह चाइनीज खीरा बाहर से चमकदार होता है.
250 ग्राम वजन, मंडी में इतना रेट
वहीं, किसान बताते हैं कि इस विदेशी चाइनीज खीरे का वजन 100 से 250 ग्राम तक होता है. यह विदेशी खीरा वजन के साथ लंबा होता है, लेकिन देसी खीरे जैसा मोटा नहीं होता है. किसान ने बताया, छतरपुर मंडी के साथ ही भोपाल-इंदौर में इस खीरे की सप्लाई करते हैं. यह खीरा मंडी में 20 से 22 रुपये किलो बेचते हैं. भोपाल-इंदौर के लोग इस खीरे को खाना सबसे ज्यादा पसंद करते हैं.
एक एकड़ में 400 क्विंटल
किसान बताते हैं कि चाइनीज खीरा 1 एकड़ में लगाया है. अभी 3 बार टूट चुका है. आगे 2 महीनों तक और टूटता रहेगा. किसान के मुताबिक एक एकड़ में 400 क्विंटल खीरा निकलने की उम्मीद है. बता दें, चाइनीज खीरा बहुत कुरकुरे होते हैं और इनका स्वाद हल्का, ताजा और सेब जैसा होता है. यह मुख्य रूप से पॉलीहाउस के अंदर उगाई जाने वाली फसल है, जिसके लिए 30-35 डिग्री तापमान मुफीद है. इन्हें 7 फीट ऊंचे तारों पर चढ़ाया जाता है. ये सलाद, रायता और अचार के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें