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ग्वालियर में एक दुष्कर्म मामले में कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया है. अदालत ने कहा कि शादीशुदा महिला द्वारा शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप कानूनी रूप से मान्य नहीं है. कोर्ट ने इसे आपसी संबंधों का मामला बताते हुए कहा कि मनमुटाव के बाद इसे दुष्कर्म का रूप दिया गया.
ग्वालियर कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया.
ग्वालियर. चर्चित दुष्कर्म मामले में अदालत ने आरोपी को बरी करते हुए अहम टिप्पणी की है, जिसने ऐसे मामलों में ‘सहमति’ और ‘धोखे’ की बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है. विशेष न्यायालय ने साफ कहा कि जब महिला स्वयं विवाहित है, तब शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप कानूनी रूप से टिक नहीं सकता. अदालत ने यह भी माना कि यह मामला आपसी संबंधों में मनमुटाव का है, जिसे बाद में दुष्कर्म का रूप दे दिया गया. कोर्ट ने कहा कि यह ना तो धोखेबाजी और ना ही दुष्कर्म का केस है, दोनों ही आरोप सिद्ध नहीं हो पाए हैं.
कोर्ट ने कहा कि बिना तलाक के दूसरी शादी संभव नहीं होती, ऐसे में शादी का झांसा देने का दावा स्वतः कमजोर हो जाता है. इस टिप्पणी के साथ अदालत ने आरोपी को दोषमुक्त कर बरी कर दिया और शिकायतकर्ता के आरोपों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में खारिज कर दिया. दरअसल, यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें अदालत ने ‘तथ्यों के भ्रम’ और सहमति के बीच फर्क को स्पष्ट किया है.
दुष्कर्म का आरोप, 3 महीनों तक जेल में रहा आरोपी
ग्वालियर की एक 38 वर्षीय विवाहित नर्स ने अपने परिचित व्यक्ति के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था. आरोप था कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए. एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जहां वह करीब तीन महीने तक रहा. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सहमति और धोखे के मामलों में कोर्ट परिस्थितियों और इरादे को देखता है. यदि शुरुआत से ही दोनों पक्षों को रिश्ते की स्थिति का पता हो, तो बाद में विवाद होने पर दुष्कर्म का मामला बनना मुश्किल होता है.
कोर्ट ने क्यों माना मामला कमजोर
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि महिला पहले से विवाहित थी और बिना तलाक के दूसरी शादी संभव नहीं थी. ऐसे में शादी का झांसा देने का आरोप तथ्यों के अनुरूप नहीं माना गया. अदालत ने कहा कि यह संबंध आपसी सहमति से बने थे और बाद में विवाद होने पर इसे दुष्कर्म का मामला बना दिया गया.
‘सहमति’ और ‘झांसे’ पर कोर्ट की टिप्पणी
विशेष न्यायालय ने कहा कि जब दोनों पक्षों को परिस्थितियों की पूरी जानकारी हो, तब ‘झांसा’ का आधार कमजोर हो जाता है. अदालत ने यह भी कहा कि महिला द्वारा लगाया गया आरोप ‘तथ्यों के भ्रम’ के दायरे में नहीं आता, इसलिए इसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता. अदालत ने साक्ष्यों और बयान के आधार पर आरोपी को दोषमुक्त कर दिया. कोर्ट ने यह भी माना कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा. इसके चलते आरोपी को बरी कर दिया गया.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें