मुगलों की पहली पसंद रहा है एमपी का यह जिला, शाहजहां-अकबर-हुमायूं के आज भी मौजूद हैं निशान

मुगलों की पहली पसंद रहा है एमपी का यह जिला, शाहजहां-अकबर-हुमायूं के आज भी मौजूद हैं निशान


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मध्य प्रदेश का बुरहानपुर जिला एक प्राचीन और ऐतिहासिक शहर माना जाता है. यहां पर आज भी शाहजहां अकबर हुमायूं के निशान देखने के लिए मिलते हैं. ऐतिहासिक शहर है इसे ढक्कन का द्वार भी कहा जाता है. इस बुरहानपुर में भव्य किले मजबूत सराय सूफी दरगाह है. अनोखी जल सुरंग प्रणालियों और राज महल आज भी मौजूद है

मध्य प्रदेश का बुरहानपुर जिला एक प्राचीन और ऐतिहासिक शहर माना जाता है. यहां पर आज भी शाहजहां अकबर हुमायूं के निशान देखने के लिए मिलते हैं. ऐतिहासिक शहर है इसे ढक्कन का द्वार भी कहा जाता है. इस बुरहानपुर में भव्य किले मजबूत सराय सूफी दरगाह है. अनोखी जल सुरंग प्रणालियों और राज महल आज भी मौजूद है जिसको देखने के लिए देश-विदेश के पर्यटक आते हैं.

इतिहासकार ने दी जानकारी 
लोकल 18 की टीम ने जब इतिहास कार डॉ वैद्य सुभाष माने से बात की तो उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश का बुरहानपुर जिला एक ऐतिहासिक जिला रहा है. यहां पर शाहजहां अकबर हुमायूं के द्वारा बनाए गए आज भी ऐतिहासिक स्थल मौजूद है. जिसको देखने के लिए देश-विदेश के लोग आते हैं. जिसमें असीरगढ़ का किला शाही किला आहुखाना राजा जयसिंह की छतरी और विश्व प्रसिद्ध कुंडी भंडारा यह उनके द्वारा ही बनाई गई संरचना है जिसको देखने के लिए आज भी लोग आते हैं और इन संरचनाओं को देखकर वास्तव में ऐसा लगता है कि उनके द्वारा कारीगरी की गई है उस जमाने की जो संरचनाएं बनी हुई है आज ऐसी कोई भी कारीगर ऐसी संरचनाओं को नहीं बना पाते हैं इसलिए इन संरचनाओं को हर कोई देखना पसंद करता है.

बुरहानपुर को कहा जाता था दख्खन का द्वार 
इतिहासकार बताते हैं कि बुरहानपुर को दख्खन का द्वार कहा जाता था क्योंकि जब भी यह राजा महाराजा लड़ाई लड़ने के लिए आगे का सफर तय करते थे तो वह बुरहानपुर में जरूर रखते थे और यहां पर कई राजा महाराजा रुके हुए हैं और उन्होंने राज भी किया है यहां पर उस जमाने के फाइव स्टार होटल भी हुआ करते थे जहां पर राजा महाराजा और राजदूत रुकने के लिए आते थे उसे अकबरी सराय कहा जाता है यहां पर 110 कमरे थे यहां पर आज भी बिना बिजली के इन कमरों में ठंड लगती है ऐसा लगता है कि कहीं से ऐसी चालू हो गया है लेकिन यहां पर बिजली और पंखा भी नहीं है.



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