शहडोल के सरसी आईलैंड की सुरक्षा व्यवस्था पर जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज डूबने से हुई 9 मौतों के बाद गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यहां पर्यटकों की सुरक्षा के लिए बुनियादी इंतजामों का अभाव है, जिसमें रेस्क्यू टीम, प्रशिक्षित गोताखोर और पुलिस के पास अपनी नाव न होना शामिल है। नाव डूबने पर बचाव के लिए प्रभावी व्यवस्था नहीं बाणसागर बैकवाटर में स्थित इस पर्यटन स्थल तक पहुंचने के लिए पर्यटक नावों का उपयोग करते हैं। हालांकि, यदि बीच पानी में कोई नाव दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है, तो तत्काल बचाव के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। सबसे नजदीकी पपौंध थाना लगभग 10 किलोमीटर दूर है। इस थाने के पास न तो अपनी नाव है और न ही प्रशिक्षित तैराक उपलब्ध हैं। ऐसे में किसी भी आपदा की स्थिति में समय पर मदद मिलना बेहद मुश्किल हो सकता है। 125 किलोमीटर दूर से आएंगे गोताखोर सरसी आईलैंड तक पहुंचने के लिए इटमा (लगभग 7 किमी), मार्कण्डेय (लगभग 4 किमी) और काढ़े प्वाइंट (2 से 2.5 किमी) से नावें संचालित होती हैं। ये सभी मार्ग जलमार्ग हैं, जिससे आपात स्थिति में राहत दल या पुलिस के पहुंचने में देरी होना तय है। पपौंध पुलिस ने स्वीकार किया है कि किसी भी आपदा की स्थिति में उन्हें मौके पर मौजूद निजी नावों पर निर्भर रहना पड़ता है। विभाग के पास न तो अपनी नाव है और न ही कोई विशेष रेस्क्यू टीम या गोताखोर उपलब्ध हैं। प्रबंधन के पास कोई अलग रेस्क्यू दल नहीं आईलैंड प्रबंधन के अनुसार, उनके पास कुल 5 नावें हैं, जिनमें एक वाटर स्कूटर और 18 लोगों की क्षमता वाली ‘जलपरी’ नाव शामिल है। प्रबंधन का दावा है कि बिना लाइफ जैकेट किसी भी पर्यटक को नाव में बैठने नहीं दिया जाता और एक नाव हमेशा स्टैंडबाय में रखी जाती है। हालांकि, प्रबंधन ने यह भी स्वीकार किया कि उनके पास कोई अलग रेस्क्यू दल नहीं है। जरूरत पड़ने पर नाव चालक ही बचाव कार्य करते हैं, जिन्हें सीमित प्रशिक्षण दिया गया है। एसडीईआरएफ के अनुसार, उनकी 8 सदस्यीय टीम शहडोल मुख्यालय में तैनात है, जो सरसी आईलैंड से लगभग 125 किलोमीटर दूर है। ऐसे में किसी बड़े हादसे की स्थिति में राहत और बचाव दल को मौके पर पहुंचने में काफी समय लग सकता है।
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