मैहर के सिविल अस्पताल में कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी के निरीक्षण के बाद अब व्यवस्थाएं सुधरने लगी हैं। कलेक्टर ने अस्पताल में गंदगी देख जो सख्ती दिखाई थी, उसका असर रविवार को साफ नजर आया। अस्पताल प्रबंधन ने अपनी गलतियों को सुधारते हुए पूरे परिसर को चमकाने का काम शुरू कर दिया है। कलेक्टर के कड़े रुख के बाद सफाई ठेकेदार ने रविवार को सुबह से ही मोर्चा संभाल लिया। अस्पताल के बाथरूम, वार्ड और लॉबी की सफाई के लिए प्रेशर पंप मशीनों का इस्तेमाल किया गया। लंबे समय से जमी गंदगी और दाग-धब्बों को हटाने के लिए खास तरह के सैनिटाइजर और केमिकल का प्रयोग किया गया। करीब आधा दर्जन सफाईकर्मी दिनभर पसीना बहाते रहे, जिससे अस्पताल का कोना-कोना साफ नजर आने लगा। कचरे और गंदगी का हुआ निपटारा अस्पताल परिसर में इधर-उधर बिखरी सूखी पत्तियों, पुराने कचरे और गंदगी को भी पूरी तरह हटा दिया गया है। सफाईकर्मियों ने कचरा इकट्ठा कर उसे निर्धारित डंपिंग यार्ड में भिजवाया। कलेक्टर की इस सख्ती से अस्पताल अब पहले के मुकाबले काफी ज्यादा व्यवस्थित और साफ-सुथरा दिखने लगा है। दलालों पर लगाम कसने की तैयारी सफाई के साथ-साथ अस्पताल में एक और बड़ी समस्या पर नजर रखी जा रही है। अस्पताल परिसर में कुछ ऐसे लोग सक्रिय हैं, जो सरकारी अस्पताल आए मरीजों को बहला-फुसलाकर प्राइवेट अस्पतालों में ले जाते हैं। इस “दलाली” की शिकायतों को देखते हुए अब परिसर में सुरक्षा गार्डों की तैनाती की गई है। प्रशासन की कोशिश है कि गरीब मरीजों को इलाज के नाम पर गुमराह न किया जा सके और उन्हें सरकारी अस्पताल में ही पूरी सुविधाएं मिलें।
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