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Jabalpur Cruise Tragedy: जबलपुर बरगी बांध क्रूज हादसे में मां-बेटे की सबसे मार्मिक तस्वीर दशकों तक लोगों को याद रहेगी. जब दोनों के शव बाहर आए तो उस वक्त भी मां ने बेटे को लाइफ जैकेट में जकड़ रखा था. लेकिन, इस फोटो को क्लिक करने वाली एमपी पुलिस की एसआई सरिताा पटेल का अनुभव और चौंकाने वाला है. जानें…
Jabalpur Cruise Tragedy: जबलपुर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर पत्थर दिल इंसान की भी आंखें नम हो जाएं. बरगी बांध के जलाशय में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के बाद एक मां-बेटे की फोटो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. यह महज एक तस्वीर नहीं, बल्कि उस मां की ममता की गवाही है जो मौत के सामने भी सीना तानकर खड़ी रही. देशभर में वायरल फोटो में एक मां अपने कलेजे के टुकड़े को लाइफ जैकेट के भीतर सीने से सटाए हुए नजर आ रही है.
नर्मदा के पानी की उफनती लहरों के बीच जिंदगी और मौत की जंग लड़ते हुए इस मां को बस यही फिक्र थी कि चाहे जो हो जाए, उसके बच्चे पर आंच नहीं आनी चाहिए. लेकिन, मां-बेटे का शव नदी से बाहर आने के बाद उसकी सबसे पहली तस्वीर खींचने वाली भी एक मां ही थी. बरगी क्रूज हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर को ड्यूटी के उद्देश्य से खींचने वाली और रेस्क्यू में शामिल सब इंस्पेक्टर सरिता पटेल अपने आंसू रोक नहीं पाईं. ये दृश्य देखने के बाद उस रात उनके गले से खाना तक नहीं उतरा.
फोटो खींचना ड्यूटी का हिस्सा, मां की ममता देखकर आंसू आए…
बरगी बांध चौकी प्रभारी सरिता पटेल ने लोकल 18 को बताया, फोटो क्लिक करना उनकी ड्यूटी का हिस्सा था. जैसे ही मां और बेटे को साथ में देखा, उस वक्त अपने आप को संभाल नहीं सकी. हाथ कांपने लगे और आंसू आ गए. कहा, मेरा भी 6 साल का बेटा है. जब नदी से निकली मां-बेटे की बॉडी को लेकर एंबुलेंस की ओर भाग रही थी, तब तक एक मां के तौर पर टूट चुकी थी. एंबुलेंस तक तो आंखों से आंसुओं की धार रुकने का नाम नहीं ले रही थी. वो मंजर इतना खौफनाक था कि उसकी यादें अब पीछा नहीं छोड़ रही हैं.
ड्यूटी के दौरान बार-बार दृश्य याद आ रहा…
रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद जब रात को भोजन करने बैठी, तो जैसे ही पहला निवाला उठाया, उनकी आंखों के सामने फिर वही मां और बेटे की तस्वीर सामने आ गई. वह मां, जो आखिरी सांस तक अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए उसे जकड़े रही, उसका चेहरा उनकी आंखों के सामने तैरने लगा. उन्होंने बताया, उस विचलित कर देने वाले दृश्य की वजह से खाने का एक निवाला भी उनके गले से नीचे नहीं उतर रहा था. रात भर का सन्नाटा भी उन यादों को धुंधला नहीं कर सका. जब भी वे आंखें मूंदतीं, उन्हें वही पानी की लहरें और वह मां-बेटा दिखाई देते. रात के अंधेरे में वही दृश्य बार-बार उनकी आंखों के सामने आता रहा.
आज तक ड्यूटी में ऐसा नहीं देखा…
सरिता पटेल ने बताया, एक पुलिस अधिकारी के रूप में उन्होंने कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया है, लेकिन इस दृश्य ने उनकी आत्मा को झकझोर कर रख दिया है. यह एहसास कि एक मां मौत को करीब देखकर भी सिर्फ अपने बच्चे के लिए प्रार्थना कर रही थी, उन्हें सोने नहीं दे रहा है. रेस्क्यू के दौरान के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा, सबकी प्राथमिकता सिर्फ जिंदगियां बचाना थी. अपनी ड्यूटी के दौरान आजतक ऐसा नहीं देखा.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें