फिल्मों जैसी कहानी! ₹40000 की ठगी ने बदला जीवन, अब कांप रहे साइबर ठग

फिल्मों जैसी कहानी! ₹40000 की ठगी ने बदला जीवन, अब कांप रहे साइबर ठग


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Satna News: साइबर अपराध से लड़ना किसी एक व्यक्ति के बस की बात नहीं है. प्रकाश पुलिस, बैंकिंग सेक्टर और साइबर सेल के साथ तालमेल बिठाकर काम करते हैं. उनकी लगन को देखते हुए अब पुलिस-प्रशासन भी उन्हें पूरा सहयोग करता है.

सतना. कहते हैं कि ठोकर लगने के बाद इंसान या तो टूट जाता है या फिर इतना मजबूत हो जाता है कि दूसरों के लिए मिसाल बन जाता है. मध्य प्रदेश के सतना के 25 वर्षीय प्रकाश सिंह के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. एक समय था, जब प्रकाश खुद साइबर ठगों के जाल में फंस गए थे और अपनी मेहनत की कमाई के 40 हजार रुपये गंवा बैठे थे लेकिन आज वही प्रकाश रीवा और सतना संभाग में साइबर अपराधियों के लिए काल बन चुके हैं. बिना किसी सामाजिक या सरकारी फंडिंग के अपनी जेब से पैसे खर्च कर वह एक ऐसी मुहिम चला रहे हैं, जिसने अब तक हजारों लोगों को कंगाल होने से बचाया है. यह कहानी सिर्फ एक ठगी की नहीं बल्कि एक ठगे गए व्यक्ति के साइबर वॉरियर बनने की कहानी है.

इस पूरे अभियान की नींव एक कड़वे अनुभव पर टिकी है. प्रकाश गहरनाला के एक प्रोजेक्ट में ठेकेदारी का काम कर रहे थे. कड़ी मशक्कत के बाद जब उन्हें पेमेंट मिली, तो साइबर ठगों ने बड़ी चालाकी से उनके खाते से 40 हजार रुपये साफ कर दिए. जब प्रकाश मदद के लिए पुलिस के पास पहुंचे, तो वहां से मिले जवाब ने उन्हें झकझोर कर रख दिया. पुलिस अधिकारियों ने कहा कि आप तो पढ़े-लिखे हो, फिर इस जाल में कैसे फंस गए. यही वो पल था, जिसने प्रकाश की सोच बदल दी. उन्हें अहसास हुआ कि अगर एक पढ़ा-लिखा युवा ठगी का शिकार हो सकता है, तो गांव-देहात के मासूम और कम पढ़े-लिखे लोगों का क्या हाल होता होगा. उन्होंने समझ लिया कि डिजिटल इंडिया के इस दौर में तकनीक तो आ गई है लेकिन सुरक्षा की समझ की भारी कमी है. बस उसी दिन प्रकाश ने ठान लिया कि जो उनके साथ हुआ, वो किसी और के साथ नहीं होने देंगे.

जेब खर्च से शुरू किया सफर
प्रकाश पेशे से ठेकेदार हैं और अपनी इसी कमाई का एक हिस्सा वह समाजसेवा में लगा रहे हैं. 2021 से शुरू हुए इस साइबर जागरूकता अभियान के इस सफर में उन्होंने अब तक करीब 1.50 लाख रुपये अपनी जेब से खर्च कर दिए हैं. यह पैसा स्कूलों-कॉलेजों में वर्कशॉप करने, दीवारों पर विज्ञापन लिखवाने और सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचने में इस्तेमाल होता है. प्रकाश का कहना है कि उनका मकसद इन्फ्लूएंसर बनना या पैसे कमाना नहीं है बल्कि लोगों को जागरूक करना है. आज उनका यह नेटवर्क व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से चलता है, जिसमें करीब 5000 से 6000 लोग जुड़े हुए हैं. इनमें से 500 एक्टिव मेंबर्स ऐसे हैं, जो हर वक्त लोगों की मदद के लिए तैयार रहते हैं. प्रकाश की इस मेहनत का नतीजा है कि आज न सिर्फ सतना बल्कि भोपाल, टीकमगढ़ और जबलपुर जैसे शहरों से भी लोग मदद के लिए उनके पास पहुंच रहे हैं.

हर चाल का तोड़ सिखा रहे प्रकाश
आजकल ठग नए-नए पैंतरे अपना रहे हैं. प्रकाश अपनी वर्कशॉप में लोगों को विस्तार से समझाते हैं कि कैसे डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराया जाता है, साथ ही कैसे फर्जी पार्सल या कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए अकाउंट खाली कर दिए जाते हैं. वह लोगों को फिशिंग लिंक, यूपीआई स्कैम, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और ऑनलाइन जॉब के नाम पर होने वाले धोखे से बचने के तरीके सिखाते हैं. वह हर मंच से लोगों को प्रेरित करते हैं कि जैसे ही ठगी हो, बिना घबराए तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें. प्रकाश का कहना है कि ठगी होने पर लोग अक्सर लोकलाज के डर से या सही जानकारी न होने के कारण भटकते रहते हैं. उनकी संस्था ऐसे ही लोगों को सही रास्ता दिखाती है.

पुलिस और प्रशासन का साथ
साइबर अपराध से लड़ना किसी एक व्यक्ति के बस की बात नहीं है. प्रकाश पुलिस विभाग, बैंकिंग सेक्टर और साइबर सेल के साथ तालमेल बिठाकर काम करते हैं. उनकी लगन को देखते हुए अब प्रशासन भी उन्हें पूरा सहयोग देता है. उनके पास मोबाइल गुम होने के करीब 50 मामले आए थे. प्रकाश के अभियान और पुलिस की सक्रियता से इनमें से 27-28 मोबाइल फोन रिकवर कर उनके असली मालिकों को सौंपे जा चुके हैं. जो लोग बाहर से मदद मांगते हैं, उनकी रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कराई जाती है और फिर उन्हें संबंधित थाने भेजा जाता है ताकि कानूनी कार्रवाई हो सके. अब तक वह 500 से ज्यादा लोगों की वित्तीय और व्यक्तिगत परेशानियों का समाधान कर चुके हैं.

एक ही सपना- सतना में बने साइबर थाना
प्रकाश का काम सिर्फ जागरूकता तक सीमित नहीं है, वह सिस्टम में बदलाव भी चाहते हैं. उनकी सबसे बड़ी मांग और सपना यह है कि सतना में एक समर्पित साइबर थाना खोला जाए. इसके लिए वह मुख्यमंत्री से लेकर विधायक, सांसदों और राज्य मंत्रियों तक को पत्र लिख चुके हैं और व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर साइबर थाना बनाने का निवेदन कर चुके हैं.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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