प्लास्टिक बोतल नहीं, तांबे के लोटे गिलास में पानी पी रहे सांसद-विधायक

प्लास्टिक बोतल नहीं, तांबे के लोटे गिलास में पानी पी रहे सांसद-विधायक


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भाजपा मध्यप्रदेश का पचमढ़ी में चल रहा अभ्यास वर्ग प्लास्टिक फ्री और ईकोफ्रेंडली है. तांबे की बोतलों और जूट के आईडी कार्ड का उपयोग हो रहा है. संघ के पंच परिवर्तन की झलक दिख रही है.

प्लास्टिक फ्री और ईकोफ्रेंडली भी है भाजपा का ‘सांसद व‍िधायक अभ्यास वर्ग.’ (Image: News18)

हाइलाइट्स

  • भाजपा का अभ्यास वर्ग प्लास्टिक फ्री और ईकोफ्रेंडली है.
  • तांबे की बोतलों और जूट के आईडी कार्ड का उपयोग हो रहा है.
  • सांसद-विधायक तांबे के लोटे-गिलास से पानी पी रहे हैं.

भोपाल. भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश का पचमढ़ी में चल रहा अभ्यास वर्ग पूरी तरह से प्लास्टिक फ्री और ईकोफ्रेंडली वातावरण में आयोजित हो रहा है. 14 से 16 जून तक पचमढ़ी में चल रहे भाजपा मध्यप्रदेश के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के इस ‘सांसद- विधायक अभ्यास वर्ग’ में पार्टी की विचारधारा मंच से वरिष्ठ नेताओं द्वारा बताई जा रही है. इसके अलावा यहां की छोटी-छोटी व्यवस्थाओं में भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंच परिवर्तन की झलक दिखाई दे रही है.

इतने बड़े आयोजन जिसमें पूरे प्रदेश के भाजपा सांसद, विधायक, मंत्री और पार्टी संगठन के बड़े नेता मौजूद हैं, वहां प्लास्टिक बिल्कुल भी उपयोग में नहीं लाई जा रही. इस लिहाज से पूरे अभ्यास वर्ग में पानी की डिस्पोजेबल बोतलों की जगह तांबे की बोतलों का इस्तेमाल किया जा रहा है. आपको इस पूरे क्षेत्र में एक भी प्लास्टिक डिस्पोजेबल दिखाई नहीं देगा. इसका खास ध्यान रखते हुए पीने के पानी के स्थान पर तांबे के लोटे और गिलास रखे गए हैं. सभी सांसद, विधायक, मंत्री और संगठन के शीर्ष नेता तक इन्हीं तांबे के लोटे-गिलास से पानी पी रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि संघ पंच परिवर्तन पर कार्य कर रहा है. पंच परिवर्तन में नागरिक कर्तव्य, स्वदेशी, पर्यावरण, समरसता और कुटुंब पर जोर दिया जा रहा है. इस अभ्यास वर्ग में संघ के पंच परिवर्तन की झलक देखने को मिल रही है.

आईडी कार्ड तक में पर्यावरण का ध्यान

सांसद-विधायक अभ्यास वर्ग में शामिल सभी कार्यकर्ताओं को एक प्रवेशिका (आईडी कार्ड) दी गई है जिसपर उनका नाम और दायित्व वगैरह लिखा हुआ है. इस प्रवेशिका को पूरे समय गले में पहनने के निर्देश दिए गए हैं. यह प्रवेशिका तक  प्लास्टिक की बजाय जूट की बनी हुई है. इसकी डोरी भी जूट के कपड़े की है. यानी प्रवेशिका और डोरी में तक प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा.

Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in … और पढ़ें

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