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MP BJP Politics : पचमढ़ी में भाजपा के तीन दिवसीय शिविर में 201 से अधिक नेता शामिल हुए, जहां अनुशासन, चुनावी रणनीति पर जोर दिया गया. कांग्रेस ने इसे ‘सरकारी पिकनिक’ कहा है. कांग्रेस ने कहा कि जनता के पैसों पर ने…और पढ़ें
पचमढ़ी में भाजपा ने अपने विधायक-मंत्री और सांसदों को अनुशासन का पाठ पढाया.
हाइलाइट्स
- भाजपा ने पचमढ़ी में तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया.
- शिविर में अनुशासन, चुनावी रणनीति और छवि सुधार पर जोर दिया गया.
- कांग्रेस ने इसे ‘सरकारी पिकनिक’ कहकर कटाक्ष किया.
मध्यप्रदेश के शांत पहाड़ी शहर पचमढ़ी में 14-16 जून को भाजपा ने जो तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया, वह सिर्फ ‘क्लासरूम’ नहीं था-बल्कि पार्टी की चुनावी रणनीति, आत्मविश्लेषण और छवि सुधार का मंच भी बन गया. इस शिविर में 201 से अधिक सांसद, विधायक, मंत्री और संगठन कार्यकर्ता शामिल हुए, जहां मोबाइल फोन प्रतिबंधित रहे, योग-सत्र से शुरुआत हुई और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे प्रतीकात्मक आयोजनों ने माहौल को गंभीर बनाया. लेकिन जब भाजपा इसे अनुशासन और विजन का उत्सव बता रही थी, तो कांग्रेस ने इसे ‘सरकारी पिकनिक’ करार देकर कटाक्ष किया है. कांग्रेस ने कहा कि भाजपा सरकारी पिकनिक कर रही है, नेता, सांसद-विधायकों के साथ मंत्रीगण मजे कर रहे हैं और प्रदेश में जनता परेशान हो रही है.
सोशल मीडिया और जमीनी जुड़ाव
विंदूत तावड़े ने विशेष तौर पर सोशल मीडिया की जिम्मेदारी समझाई. डिजिटल युग में राजनीति अब सिर्फ मंचों तक सीमित नहीं रही, बल्कि WhatsApp, Facebook, X (Twitter) और Reels तक फैल गई है. इसलिए अब भाजपा चाहती है कि उसका हर नेता-हर पोस्ट-सोच समझकर करे और उसमें पार्टी की उपलब्धियों का सही प्रतिनिधित्व हो. इसी के साथ, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का जोर इस बात पर रहा कि ज़मीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद हो-ताकि पार्टी का मूल आधार मज़बूत रहे और सिर्फ डिजिटल लहर से उम्मीद न लगाई जाए.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य की आर्थिक प्रगति, राजस्व बजट और सिंचाई विस्तार जैसी योजनाओं पर चर्चा कर यह दिखाया कि भाजपा ‘विकास’ को भी प्रमुख मुद्दा बनाए रखना चाहती है. वहीं शिविर के दूसरे दिन SC/ST आरक्षित सीटों पर विशेष रणनीति के लिए अलग-अलग सत्र आयोजित किए गए, जो यह दिखाते हैं कि पार्टी जातिगत गणित को भी नए ढंग से समझना चाहती है.
कांग्रेस की प्रतिक्रिया: ‘पिकनिक पॉलिटिक्स’
कांग्रेस ने इस पूरे शिविर को “सरकारी पिकनिक” बताते हुए भाजपा पर तंज कसा है. विपक्ष का कहना है कि जनता को छोड़कर नेता अब पहाड़ियों में ‘योग और उपदेश’ ले रहे हैं. लेकिन राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो यह कटाक्ष कम और असहजता ज़्यादा दिखाता है-क्योंकि अनुशासन और संगठन मजबूती की राजनीति लंबे समय में ज्यादा असरदार होती है. पचमढ़ी शिविर भाजपा के लिए एक ‘रीसेट बटन’ साबित हो सकता है-जहां न सिर्फ चुनावी रणनीति तय हुई, बल्कि पार्टी ने खुद को ‘कम बोलने, ज़्यादा करने’ के अभियान में ढालने की तैयारी की. वहीं कांग्रेस की व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया दर्शाती है कि भाजपा का यह साइलेंस मोड राजनीतिक शोर में एक नई चालाकी बन सकता है.
सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें
सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प… और पढ़ें