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Ujjain News: आशा कार्यकर्ता सीमा बोलोनिया ने लोकल 18 से कहा कि महिलाओं की जांच तो आसानी से हो जाती है लेकिन पुरुषों की कमर का नाप लेते हुए ठीक नहीं लगता. कई बार लोग शराब पीकर नाप देते हैं, जो भद्दे कमेंट करते ह…और पढ़ें
उज्जैन. मध्य प्रदेश के उज्जैन में इन दिनों महिला आशा कार्यकर्ताओं को स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू किए गए स्वस्थ यकृत मिशन के तहत एक उलझन में डाल दिया गया है. उज्जैन में आशा कार्यकर्ता पुरुषों की कमर नापने के काम से शर्मिंदगी महसूस कर रही हैं. उनका कहना है कि इस काम के दौरान कई बार भद्दे कमेंट झेलने पड़ते हैं और असहज स्थिति बनती है. दरअसल उज्जैन स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू किए गए स्वस्थ यकृत मिशन के तहत उज्जैन जिले में अब तक 40000 से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है. इस मिशन में 30 से 65 वर्ष के पुरुषों और महिलाओं की उम्र, वजन, ऊंचाई और कमर की नाप लेकर लीवर से जुड़ी बीमारियों की पहचान की जा रही है. यह मिशन तो ठीक है लेकिन आशा कार्यकर्ताओं को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि वह पुरुषों से कमर की नाप देने के लिए कहने में हिचक रही थीं. दूसरी तरफ स्क्रीनिंग का कार्य तेजी से करने का दबाव बढ़ता जा रहा था. मेरे पति प्राइवेट जॉब करते हैं. उन्हें उनके यहां से छुट्टी दिलवाई और वह उन्हें साथ लेकर गईं ताकि वह पुरुषों की कमर की नाप ले सकें.
उज्जैन जिले में करीब 50 हजार की स्क्रीनिंग
बताते चलें कि जिले में सोमवार तक कुल 40922 लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है. इनमें 18104 पुरुष और 22818 महिलाएं हैं. बताया जा रहा है कि स्क्रीनिंग के बाद लीवर से जुड़ी बीमारी के कुछ गंभीर रोगी भी चिह्नित हुए हैं, जिनकी जांच और इलाज की प्रक्रिया चल रही है.