जन्मकल्याणक में 1008 कलशों से भगवान का अभिषेक: टिमरनी में पंचकल्याणक महोत्सव के चौथे दिन निकाली गई शोभा यात्रा – Harda News

जन्मकल्याणक में 1008 कलशों से भगवान का अभिषेक:  टिमरनी में पंचकल्याणक महोत्सव के चौथे दिन निकाली गई शोभा यात्रा – Harda News


हरदा जिले के टिमरनी नगर में चल रहे श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ के चौथे दिन मंगलवार को भगवान का जन्मकल्याणक पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया गया। महोत्सव स्थल अमृतश्री कॉलेज परिसर को अयोध्या नगरी के रूप में सजाया गया।

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इसके बाद भगवान को नगर भ्रमण कराते हुए सुमेरु पर्वत स्थित पांडुकशिला पर ले जाया गया, जहां सभी इंद्रों ने क्रमबद्ध रूप से 1008 कलशों से भगवान का अभिषेक किया।

शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से निकली। इसमें गजराज, कलश यात्रा और रथयात्रा धार्मिक संगीत के साथ शामिल रही। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चन कर शोभायात्रा का स्वागत किया। वैश्य समाज के लोगों ने भी आयोजन में भागीदारी निभाई।

1008 कलशों से भगवान का अभिषेक किया गया।

मुनिश्री निर्णयसागर महाराज ने जन्मकल्याणक का महत्व बताते हुए अहिंसा, संयम और तप की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति और संस्कारवान परिवार में जन्म को सौभाग्य बताया।

जैन धर्म में पंचकल्याणक का विशेष महत्व पंचकल्याणक समिति अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन और कोषाध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि जैन धर्म में गर्भ कल्याणक, जन्म कल्याणक, दीक्षा कल्याणक, केवलज्ञान कल्याणक और मोक्ष कल्याणक शामिल हैं। जन्म कल्याणक के दौरान तीर्थंकर बालक का 1008 कलशों से पांडुकशिला पर अभिषेक किया जाता है। फिर भगवान को सुंदर वस्त्र पहनाकर माता-पिता को सौंपा जाता है।

6 से 8 दिन चलता है पंचकल्याणक महोत्सव

यह धार्मिक उत्सव 6 से 8 दिनों तक चलता है, जिसमें तीर्थंकरों की मूर्तियों की प्रतिष्ठा की जाती है और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से पंचकल्याणकों का उत्सव मनाया जाता है।



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