यूपी-एमपी बॉर्डर बॉर्डर इलाके में सफर जल्‍द होगा पूरा, नहीं रुकेंगी ट्रेनें!

यूपी-एमपी बॉर्डर बॉर्डर इलाके में सफर जल्‍द होगा पूरा, नहीं रुकेंगी ट्रेनें!


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Indian Railway- झांसी रेल मंडल ने झांसी-मानिकपुर रेलखंड के 292 किमी ट्रैक में से 75 किमी का डबलिंग पूरा किया है. बरुआसागर-टेहरका खंड के 22 किमी ट्रैक का दोहरीकरण हुआ, जिससे ट्रेनों की गति और सुरक्षा बढ़ेगी.

ट्रैक के डबलिंग का काम शुरू.

झांसी. झांसी रेल मंडल ने रेलवे ट्रैक डबलिंग में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. झांसी-मानिकपुर रेलखंड के 292 किलोमीटर लंबे ट्रैक को दोहरी लाइन बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 75 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है. हाल ही में बरुआसागर-टेहरका खंड के 22 किलोमीटर ट्रैक का दोहरीकरण पूरा हुआ. रेल संरक्षा आयुक्त ने इस खंड को ट्रेन चलाने की मंजूरी दे दी. झांसी-मानिकपुर खंड में अब तक 75 किलोमीटर ट्रैक डबलिंग लाइन वाला हो गया है.
इससे पहले, महोबा-बेलाताल खंड में 31 किलोमीटर और टेहरका-मऊरानीपुर खंड में 22 किलोमीटर का डबलिंग पूरा हो चुका है. बरुआसागर-टेहरका खंड के 22 किलोमीटर के पूरा होने से कुल 75 किलोमीटर ट्रैक दोहरी लाइन वाला बन गया है. डबलिंग लाइन होने से ट्रेनों का परिचालन ज्यादा सुरक्षित, तेज, और सुचारू होगा. इससे यात्री और मालगाड़ियां बिना रुकावट तेज गति से चल सकेंगी.
डबलिंग से रेलवे का ऑपरेशंस आधुनिक और तेज बनेगा. ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी, जिससे यात्रियों को कम इंतजार करना पड़ेगा. मालगाड़ियों की आवाजाही भी तेज होगी, जो व्यापार और अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद है. इस खंड का इलेक्‍ट्रीफिकेशन और डबलिंग रेलवे के विकास में एक बड़ा कदम है. इससे भविष्य में रेल यात्रा और भी बेहतर होगी.

ट्रैक की खासियत

बरुआसागर-टेहरका के 22 किलोमीटर नए ट्रैक पर ट्रेनें अधिकतम 95 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं. गाड़ी नंबर 12190 ने इस खंड पर 90 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से सफलतापूर्वक यात्रा की. यह इस खंड की मजबूती और गुणवत्ता को दर्शाता है. रेलवे का लक्ष्य यात्रियों को सुगम और तेज यात्रा सफर कराना है. इसके लिए झांसी मंडल में दोहरीकरण और तीसरी लाइन का काम तेजी से चल रहा है.

ट्रेनों को पास कराने के लिए नहीं रुकना होगा

दोहरी लाइन होने से ट्रेनें एक ही ट्रैक पर इंतजार नहीं करेंगी. इससे समय की बचत होती है और दुर्घटना का खतरा भी कम होता है. विद्युतीकरण से डीजल की खपत कम होगी, जो पर्यावरण के लिए भी अच्छा है. बरुआसागर-टेहरका खंड की शुरुआत से यात्रियों और माल परिवहन को फायदा होगा.

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