1976 के बाद नहीं कर पाया कोई ऐसा करिश्मा
आकाशदीप ने 1976 के बाद ऐसा करिश्मा किया है जो अब तक कोई और गेंदबाज नहीं कर पाया था, उन्होंने इंग्लैंड के टॉप-5 बल्लेबाजों में से चार को आउट किया. 49 साल पहले यह काम वेस्टइंडीज के माइकल होल्डिंग ने किया था. हैरी ब्रूक को आउट कर यह रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले आकाशदीप ने क्रिकेट के इतिहास में एक नई उपलब्धि दर्ज की.
मैच के बाद जब चेतेश्वर पुजारा ने उनसे बात की, तब उन्होंने बताया कि यह जीत उन्होंने अपनी कैंसर से जूझ रही बहन को समर्पित की है. भावुक होते हुए उन्होंने कहा, “ये सब आपके लिए है और हर वक्त मेरी आंखों के सामने आपका चेहरा रहता है.” उनकी यह बात सुनकर देशभर के खेलप्रेमी भावुक हो उठे.
गांव की गलियों से प्रोफेशनल क्रिकेट तक
आकाशदीप की यह सफलता सिर्फ देश के लिए ही नहीं, बल्कि उनके जिले रोहतास के लिए भी गर्व की बात बन गई है. शिवसागर प्रखंड के छोटे से गांव बड्डी में जन्मे आकाशदीप ने गांव की गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी एक अलग पहचान बना ली है. उनके पिता रायपुर चौर हाई स्कूल में फिजिकल एजुकेशन के टीचर थे. पिता के निधन के बाद भी आकाशदीप ने गांव में ही कड़ी मेहनत की और बिहार में क्रिकेट की सीमाओं को पार करते हुए बंगाल का रुख किया. वहीं से उन्होंने अपना प्रोफेशनल क्रिकेट करियर शुरू किया.
उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर पूरे गांव और जिले में खुशी का माहौल है. स्थानीय युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला. ‘लोकल 18’ से बातचीत में क्रिकेट प्रेमी धर्मेंद्र कुमार ने कहा, “हमें भारत की जीत से जितनी खुशी है, उससे कहीं ज्यादा इस बात का गर्व है कि इस जीत के सूत्रधार हमारे ही जिले के आकाशदीप रहे. उन्होंने यह साबित कर दिया कि छोटे गांवों से भी बड़े खिलाड़ी निकल सकते हैं.”
एक अन्य युवा अंशु कुमार ने कहा, “मुझे पहले नहीं लगता था कि आकाशदीप इतने शानदार प्रदर्शन करेंगे, लेकिन उन्होंने सबको गलत साबित कर दिया. उन्होंने न सिर्फ बिहार और रोहतास, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है.”
वहीं मनोज कुमार यादव ने कहा, “मेरी बहन की तबीयत खराब थी, लेकिन मैंने पूरा मैच देखा. आकाशदीप के खेल के प्रति जुनून को देखकर मैं हैरान रह गया. उन्होंने न तो कभी थकावट दिखाई और न ही कभी ऐसा लगने दिया कि उनकी बहन कैंसर जैसी बड़ी बीमारी से लड़ रही हैं. यही उन्हें एक महान खिलाड़ी बनाता है.”
करते रहेंगे देश के लिए इस तरह का प्रदर्शन
मनोज ने आगे बताया कि आकाशदीप का परिवार शुरू से ही संघर्षशील रहा है. उनके दादा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. वहीं, उनके पिता और भाई का असमय निधन हो गया, लेकिन इन सबके बावजूद आकाशदीप ने कभी हार नहीं मानी. वह आज न सिर्फ खुद को संभाल रहे हैं, बल्कि पूरे परिवार की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं. गांव के लोग अब उम्मीद जता रहे हैं कि उनकी बहन जल्द ही पूरी तरह ठीक होंगी और आकाशदीप इसी तरह देश के लिए शानदार प्रदर्शन करते रहेंगे.