मारपीट का एक वीडियो भी सामने आया है।
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यह बात जबलपुर के सिहोरा सिविल अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर राघवेंद्र त्रिपाठी ने सोशल मीडिया और डॉक्टरों के ग्रुप पर लिखा है। राघवेंद्र 2011 बैच के पासआउट डॉक्टर हैं।
उधर, सिहोरा पुलिस का कहना है कि 6 जुलाई की रात डॉक्टर का सिहोरा में रहने वाले अंकुर तिवारी नामक व्यक्ति से विवाद हुआ था। झगड़े में डॉक्टर ने अंकुर को गंभीर चोट पहुंचाई थी। हालांकि, अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
ऐसे शुरू हुआ था विवाद
जानकारी के मुताबिक, सिहोरा स्वास्थ्य केंद्र में कुछ दिनों पहले अंकुर तिवारी और उसके साथियों ने अस्पताल के फैली गंदगी का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में पोस्ट किया था। रविवार की रात को जिस ढाबे में अंकित अपने दोस्तों के साथ खाना खा रहा था, वहीं पर डॉक्टर राघवेंद्र त्रिपाठी भी पहुंच गया। जहां दोनों के बीच विवाद हो गया। मौके पर क्षेत्र के कुछ लोग भी बैठे हुए थे, जिन्होंने समझाया। कुछ देर बाद फिर से विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि डॉक्टर ने अंकित और उसके साथियों के साथ जमकर मारपीट की, जिसमें दो लोगों के चेहरे में गंभीर चोट आई थी।
आरोप है कि डॉक्टर ने अंकित और उसके साथियों के साथ जमकर मारपीट की, जिसमें दो लोगों के चेहरे में गंभीर चोट आई है।
पोस्ट डिलीट कर छुट्टी पर चल गए डॉक्टर
रविवार की देर रात डॉक्टर की पिटाई से घायल हुए युवक सुबह एमएलसी के लिए सिहोरा अस्पताल पहुंचे, जहां आज राघवेंद्र त्रिपाठी की ही ड्यूटी थी, लेकिन पोस्ट डिलीट करने के बाद डॉक्टर छुट्टी पर चले गए थे, जिसके चलते आज सुबह घायल लड़कों की एमएलसी नहीं हुआ है। शाम को ड्यूटी में आए दूसरे डॉक्टर ने अंकुर और उसके दो अन्य साथियों की एमएलसी करवाई है। सिहोरा पुलिस के मुताबिक, घायल अंकुर ने डॉक्टर राघवेंद्र त्रिपाठी के खिलाफ लिखित में शिकायत दी है।
आईएमए ने की शिकायत
डॉक्टर राघवेंद्र त्रिपाठी ने रविवार देर रात ग्रुप और सोशल मीडिया पर पहले पोस्ट की और फिर सोमवार सुबह उसे डिलीट कर दिया। उधर, आईएमए के ग्रुप में भी डॉक्टर ने अपनी शिकायत पोस्ट की थी, जिसे अध्यक्ष डॉक्टर ऋचा शर्मा ने सिहोरा थाना पुलिस को भेजकर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
डॉक्टर ऋचा शर्मा का कहना है कि हमारे डॉक्टरों के ग्रुप में रात साढ़े तीन बजे राघवेंद्र त्रिपाठी द्वारा एक लेटर भेजा गया था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि कुछ लोगों ने पिस्टल दिखाकर उनके साथ मारपीट की है।

जबलपुर के सिहोरा सिविल अस्पताल में पदस्थ डॉ. राघवेंद्र त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखी, फिर बाद में डिलीट कर दिया।
सोशल मीडिया पर डॉक्टर ने लिखा-
मैं डॉ. राघवेंद्र त्रिपाठी, सिविल अस्पताल सिहोरा में चिकित्सा अधिकारी के पद पर पदस्थ हूं। दिनांक 6/7/25 को शाम के समय जब मैं अस्पताल से निकला, तो तीन युवकों द्वारा मुझ पर बंदूक से जानलेवा हमला किया गया। बंदूक मेरे सीने पर तानी गई, लेकिन बंदूक फेल हो जाने के कारण उनका प्रयास असफल हो गया।
तभी वहां मौजूद लोगों द्वारा बचाव के प्रयास में आपसी मुठभेड़ हुई। मैंने तत्काल टीआई सिहोरा को कॉल किया, लेकिन उन्होंने कहा कि यह सब छोटी-मोटी बातें हैं और अक्सर होती रहती हैं। टीआई द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं की गई, बल्कि मुझे यह कहकर डरा दिया गया कि अगर आप एफआईआर करेंगे तो अच्छा नहीं होगा।
इस भय के कारण मैं चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्य करने में स्वयं को असमर्थ पा रहा हूं और इसी क्षण मैं अपने पद से इस्तीफा देता हूं। क्योंकि जहां ऐसे भ्रष्ट अधिकारी हों, वहां काम करना अत्यंत कठिन है।
आज ईश्वर की कृपा से मैं बच गया।, लेकिन पता नहीं अगली बार क्या हो। यदि मेरा यह संदेश किसी उच्च अधिकारी तक पहुंच रहा हो, तो कृपया मुझसे संपर्क करें, क्योंकि मैं बेहद भयभीत और डरा हुआ हूं।
मुझे लगता है कि डॉक्टर होने का दंड मुझे इस रूप में मिला है, क्योंकि मैं लोगों की समस्याएं सुनता हूं, उनका इलाज करता हूं। शायद इसीलिए ऐसे भ्रष्ट अधिकारी मेरी कोई मदद नहीं कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि वे मुझे बचाने के बजाय मुझे मरवाना चाहते हैं।