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Pandharinath Rukmani Temple: महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने इस मंदिर का निर्माण करवाकर भगवान की स्थापना की थी. आज भी यहां जन्माष्टमी पर धूम मचती है. यहां के प्रसाद का बड़ा महत्व है…
यहां भगवान की श्वेत प्रतिमा विराजमान है, जो पंढरपुर के मुख्य मंदिर की प्रतिमाओं का ही स्वरूप मानी जाती है. महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने इस मंदिर का निर्माण करवाकर भगवान की स्थापना की थी. बाद में उनके गोदी पुत्र यशवंतराव होल्कर (प्रथम) ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया. यह स्थान न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि होलकर शासन की ऐतिहासिक धरोहर भी है. यहां भक्त नर्मदा किनारे की अद्भुत शांति के बीच भव्य मंदिर को निहारते हैं.
मंदिर से जुड़ी एक रोचक कथा भी है. पुजारी विपिन तिवारी के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि पंढरपुर के राजा को एक समय चर्म रोग हो गया था. स्वप्न में उन्हें संकेत मिला कि महेश्वर में चलने वाले अन्नकूट का जूठन खाने से उनका रोग दूर हो जाएगा. राजा गुप्त रूप से महेश्वर पहुंचे और अन्नकूट का जूठन खाया, जिससे वे स्वस्थ हो गए. इसके बाद उन्होंने अहिल्याबाई होल्कर से पूछा कि वे उन्हें क्या भेंट दें. तब मातोश्री अहिल्या बाई ने पंढरपुर से भगवान पंढरीनाथ का विग्रह मांगा, जो आज भी इस मंदिर में विराजमान है.
अखंड “श्री हरे कृष्ण हरे राम” नाम संकीर्तन
मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम अखंड “श्री हरे कृष्ण हरे राम” नाम संकीर्तन होता है. यह परंपरा तब से चली आ रही है, जब प्रसिद्ध कथावाचक पूज्य श्री रामचंद्र डोंगरे जी महाराज ने महेश्वर में अपनी 108वीं भागवत कथा पूरी की थी. इसके अलावा, अन्नकूट सेवा भी लगातार चलती रहती है, जिसमें भक्तों को प्रसाद के रूप में भोजन कराया जाता है.
जन्माष्टमी पर कई आयोजन
जन्माष्टमी पर्व यहां बड़े उत्साह और भक्ति भाव से मनाया जाता है. इस दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, मटकी फोड़ प्रतियोगिता, दही लुटाना और भजन संध्या का आयोजन किया जाता है. सालभर यहां विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम भी होते रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. वहीं, जन्माष्टमी के मौके पर पूरे मंदिर को आकर्षक लाइटिंग से सजाया भी जाता है.