वरघोड़ा में शामिल हुई समाज की महिलाएं।
नीमच के चीताखेड़ा में जैन समाज ने भगवान महावीर के बाल स्वरूप का वरघोड़ा रविवार को निकाला। श्रीमुनि सुव्रत स्वामी जिनालय से शुरू हुए इस वरघोड़े में बड़ी संख्या में जैन अनुयायी शामिल हुए।
.
जैन श्राविकाओं ने भगवान महावीर के बाल स्वरूप मुखोटे को संचित पालने में विराजमान किया। वरघोड़े के मार्ग पर जैन अनुयायियों ने पलक पांवड़े बिछाए। पूरे मार्ग पर ‘त्रिशला नंदन वीर की जय’ और ‘जैन धर्म की जय जयकार’ के नारे गूंजते रहे।
पालने में विराजमान भगवान महावीर झुलाते जैन परिवार।
श्री चंद्र प्रभ जी जिनालय में दोपहर 1:30 बजे राजू खिमेसरा ने कल्पसूत्र का वाचन किया। त्रिशला नंदन के जन्म का वृतांत सुनते ही जिनालय में उपस्थित जैन समुदाय ने अक्षत और पुष्प वर्षा की। लोगों ने घंटी घड़ियाल बजाकर महावीर की जयघोष की और एक-दूसरे को बधाइयां दीं।
कार्यक्रम के दौरान ‘महावीर का अमर संदेश – जियो और जीने दो’ तथा ‘अहिंसा परमो धर्म’ का संदेश भी दिया गया। भक्तों ने पालने में विराजमान भगवान महावीर के बाल स्वरूप को बारी-बारी से झूला झुलाया।