11साल का आरव अब सीधे 10वीं क्लास में करेगा पढ़ाई! जबलपुर हाईकोर्ट का अजब-गजब फैसला

11साल का आरव अब सीधे 10वीं क्लास में करेगा पढ़ाई! जबलपुर हाईकोर्ट का अजब-गजब फैसला


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Jabalpur High Court Verdict: मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक अनोखा मामला सामने आया है. यहां महज 11 साल के छात्र आरव सिंह पटेल को हाईकोर्ट ने 10वीं क्लास में एडमिशन की अनुमति दे दी है. आमतौर पर 10वीं क्लास में बच्चो…और पढ़ें

जबलपुर. मध्यप्रदेश के जबलपुर में अब महज 11 साल के बच्चे का एडमिशन 10वीं क्लास में होगा. अमूमन आपने दसवीं क्लास के बच्चों की उम्र 16 साल के आसपास देखी होगी, लेकिन मध्य प्रदेश का एक मामला अजब-गजब का है क्योंकि जब दसवीं क्लास के बच्चे का रजिस्ट्रेशन स्कूल ने नहीं किया, तब पैरंट्स ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. जहां जबलपुर हाईकोर्ट ने बच्चों के पक्ष में फैसला सुना दिया.

लिहाजा अब हाई कोर्ट ने सीबीएसई चेयरमैन और स्कूल प्रबंधन को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहां हैं बच्चे की नौवीं क्लास मतलब सत्र 2024-25 की परीक्षा ली जाए और पास होने पर 2025-26 के लिए इस सत्र में एडमिशन दिया जाए. लोकल 18 की टीम से 11 साल के स्टूडेंट आरव सिंह पटेल के पिता दिलीप सिंह पटेल ने क्या बताया देखिए यह रिपोर्ट….

फर्स्ट क्लास में बच्चें ने कर दिया टीचर को प्रभावित
पिता दिलीप सिंह पटेल ने बताया कि फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में नौकरी करते हैं. उन्होंने बताया बेटे आरव का जन्म 2014 में हुआ था. तब देवास जिले में काम किया करते थे. पहले ही क्लास में आरव ने अपने टीचर्स को इतना प्रभावित कर दिया कि अगले साल सेकंड क्लास की जगह टीचर्स ने आरव को थर्ड क्लास में एडमिशन दे दिया था. जिसके बाद आरव लगातार पढ़ाई करता रहा, जैसे ही सातवीं क्लास में बेटा पहुंचा तभी ट्रांसफर हो गया और जबलपुर आ गए.

कम उम्र का हवाला देकर स्कूल ने किया था बाहर
आरव के पिता का कहना है जबलपुर के रांझी में पहुंचकर किराए का मकान लिया और नजदीक के ही सेंट जोसेफ स्कूल में एडमिशन कराया. स्कूल ने बकायदा एंट्रेंस टेस्ट लेने के बाद सातवीं क्लास में एडमिशन दिया. लेकिन जैसे ही  आरव की पढ़ाई जनवरी तक पूरी हुई, तभी दिक्कत आने लगी और बेटा नौवीं का एग्जाम नहीं दे पाया और जनवरी के दौरान दसवीं के लिए रजिस्ट्रेशन भी नहीं हो पाया. जिसको लेकर स्कूल प्रबंधन ने बुलाया.

टीसी में डेट बदलने को स्कूल ने कहां….
कम उम्र होने के कारण पीछे की क्लास पढ़ने के लिए कहा और स्कूल से बोलकर टीसी में 2014 की जगह बर्थ डेट 2010 लिखवाने के लिए कहा गया. स्कूल प्रबंधन की इस बात पर पेरेंट्स ऐसा करने से मना कर दिया क्योंकि यह संभव नहीं था, पिता ने कहा बेटे के अंदर क्वालिटी है, सीबीएसई को पत्र लिखकर परमिशन ली जानी चाहिए, लेकिन स्कूल प्रशासन ने ऐसा कुछ भी नहीं किया. हालांकि इस दौरान पेरेंट्स ने जनप्रतिनिधियों के भी दरवाजे खटखटाए लेकिन जब कुछ हासिल नहीं हुआ, एफिडेविट लेकर नौवीं क्लास की परीक्षा देने की भी बात कही गई लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. तब सीधे कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

हाईकोर्ट ने कहा बनाई जाए तीन स्पेशलिस्ट की टीम
आरव के पिता ने बताया इसको लेकर खुद सीबीएसई बोर्ड ऑफिस दिल्ली गए फिर भोपाल भी गए. उन्होंने बताया कोर्ट ने कहा कि बच्चों को 9 वीं में एडमिशन दें और 15 दिन के लिए देखरेख में रखें, साथ ही तीन स्पेशलिस्ट का एक मेडिकल बोर्ड गठित करके बच्चे की एक रिपोर्ट भी तैयार की जाए. इस बोर्ड में साइकैटरिस्ट भी शामिल हो और रिपोर्ट सीबीएसई बोर्ड को दी जाए. इसके बाद बोर्ड अपना डिसीजन लेगा. हालांकि डॉक्टर दीपा सिंह मनोचिकित्सक से पेरेंट्स ने बच्चे का आईक्यू टेस्ट भी कराया था.

आरव बोला; उम्र देखकर पढ़ाई में आए बाधा…तब यह गलत
स्टूडेंट आरव पटेल का कहना हैं यदि स्टूडेंट अपने क्लास के कई छात्रों से अच्छी पढ़ाई कर रहा हैं, अच्छे नंबर भी ला रहा हैं…ऐसे में एज क्राइटेरिया देखकर बाहर कर देना, यह बात बिल्कुल ही गलत हैं. दूसरी तरफ सेंट जोसफ स्कूल प्रबंधन से भी पक्ष रखने की कोशिश की गई. तब स्कूल प्रबंधन ने मामले में अपनी कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी.

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जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 11 साल का आरव अब सीधे 10वीं में करेगा पढ़ाई



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