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- Women Wandered For One Hour At The PHE Office, Spoken rain, There Is Pipeline But Did Not Make Connections
उज्जैन2 मिनट पहले
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पीएचई कार्यालय का घेराव करती महिलाएं।
- वार्ड 41 का मामला, छह कॉलोनियों के एक हजार से ज्यादा रहवासी बोरिंग, टैंकर के भरोसे, सड़क पर गड्ढे खोदकर भूले
- गड्ढे खोदे और बगैर कनेक्शन किए छोड़ा दुर्घटना की आशंका
बारिश के बावजूद हमें पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है। टैंकर नहीं आए तो एक से डेढ़ किलोमीटर दूर बोरिंग से पानी लाना पड़ता है। अधिकांश लोग मजदूर वर्ग से आते हैं। ऐसे में मजदूरी पर जाने से पहले उन्हें घर के लिए पानी की जुगाड़ में लगना पड़ता है। यह रोज की कहानी हो गई है। आखिर कब तक हमें पानी के लिए परेशानी झेलनी पड़ेगी। इन्हीं मांगों को लेकर बड़ी संख्या में महिलाएं शुक्रवार दोपहर में दशहरा मैदान स्थित पीएचई कार्यालय पहुंच गईं। उनका कहना था कि वे लंबे समय से पानी की किल्लत झेल रही हैं। जब उनकी सुनवाई नहीं हुई तो आखिरकार उन्हें प्रदर्शन करना पड़ा।
वार्ड 41 की महिलाएं दोपहर 12.30 बजे पीएचई कार्यालय पहुंची। महिलाओं ने बताया नीमनवासा, गलपुरा, महिला आईटीआई के पास, पांड्याखेड़ी, वैकुंठधाम और संगमनगर में पीएचई की पाइप लाइन तो है लेकिन कनेक्शन नहीं किए हैं। इसके लिए तापी कंपनी को दायित्व दिया था। कंपनी ने इन क्षेत्रों में गड्ढे भी खोदे और बगैर कनेक्शन किए उन्हें छोड़ दिया। इससे दुर्घटना की आशंका बन रहती है। महिलाओं ने पीएचई कार्यालय परिसर और उसके
गेट पर प्रदर्शन भी किया। इसके बाद पीएचई के ईई अतुल तिवारी उनसे चर्चा के लिए आए। उन्होंने बताया जिन क्षेत्रों में पाइप लाइन जोड़ने का काम शेष है, वहां पर इसे करवाने के निर्देश दिए हैं। पूर्व पार्षद तारा मालवीय के मद से मिली राशि से भी काम करवाया जाएगा।
पहले सुनवाई कर लेते तो आंदोलन नहीं करते काम छोड़कर आना पड़ा
प्रदर्शन करने आई महिलाओं ने बताया पेयजल समस्या को लेकर लंबे से अफसरों के साथ पार्षद से भी गुहार लगाई लेकिन कोई निराकरण नहीं निकला। ऐसे में काम छोड़कर उन्हें पीएचई कार्यालय आना पड़ा। एक हजार लोगों के लिए रोज पानी की इंतजाम करना आसान नहीं है। उनके क्षेत्र में पीएचई की पाइप लाइन का उन्हें कोई लाभ नहीं मिल रहा। इस संबंध में पहली बार अफसरों से आग्रह नहीं किया। इस बार भी मांग पूरी नहीं हुई तो सड़क पर उतरेंगे।
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