सीहोर जिले के बुधनी स्थित ऐतिहासिक नर्मदा घाट पर पितृपक्ष के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है। सुबह से ही लोग नर्मदा तट पर पहुंचकर अपने पितरों के लिए जल अर्पण और तर्पण कर रहे हैं।
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भाद्रपद मास की पूर्णिमा के बाद शुरू हुए 16 दिन के पितृपक्ष में तर्पण और श्राद्ध का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस समय पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण की उम्मीद रखते हैं।
नर्मदा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी श्रद्धालु बताते हैं कि यह सिर्फ धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि पूर्वजों को याद करने का एक पवित्र अवसर भी है। घाटों पर भावुक दृश्य देखने को मिल रहे हैं, जहां पुत्र अपने पिता और पौत्र अपने दादा-दादी को याद कर नम आंखों से अर्पण कर रहे हैं।
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि पितृपक्ष में नर्मदा स्नान और तर्पण का महत्व तीर्थयात्रा के बराबर है। इस दौरान बुधनी का नर्मदा घाट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। लोगों का विश्वास है कि यहां पिंडदान और तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।