मध्यप्रदेश हाईकोर्ट प्रमोशन में आरक्षण मामले में आज फिर सुनवाई करेगा। प्रकरण चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की डिवीजन बैंच सुनेगी। एक हफ्ते पहले हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने जवाब पेश किया था, जिसे याचिकाकर्ता ने अधूरा बताया था। वहीं सरकार ने नई प्रमोशन पॉल
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जनहित याचिका पर राज्य सरकार की तरफ से जबाव पेश करते हुए अधिवक्ताओं ने पिछली सुनवाई में नई और पुरानी पॉलिसी में अंतर बताया गया था, जिस पर याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि सरकार क्रीमी लेयर, क्वांटिफायबल डेटा पर जवाब नहीं दे रही है। कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया जवाब अधूरा है। इससे पहले 14 अगस्त को सुनवाई हुई थी, तब राज्य सरकार ने यह कहते हुए समय मांगा था कि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं सीएस वैद्यनाथन और तुषार मेहता को हाईकोर्ट में बहस के लिए नियुक्त किया गया है।
सरकार से ली थी अंडरटेकिंग
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से एक अंडरटेकिंग भी ली है, जिसके तहत सरकार ने नई प्रमोशन पॉलिसी को तब तक लागू नहीं करने का वादा किया है। जब तक कोर्ट अंतिम फैसला न दे दे। यानी फिलहाल नई पॉलिसी लागू नहीं की जा सकती है। सरकार ने नई प्रमोशन पॉलिसी में कुछ बदलाव किए हैं, जो कर्मचारी वर्ग में आरक्षण के नियमों को प्रभावित कर सकते हैं।
सरकार का कहना है कि यह पॉलिसी कर्मचारियों के हित में है और इसके लागू होने से सभी वर्गों को उचित मौका मिलेगा। वहीं, याचिकाकर्ता इस पॉलिसी के खिलाफ हैं और उन्हें लगता है कि इससे कुछ वर्गों का नुकसान हो सकता है।
दलील- नए सिरे से पुरानी नीति लागू की
- भोपाल निवासी डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि हाईकोर्ट साल 2002 के प्रमोशन नियमों को आरबी राय केस में रद्द कर चुका है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने नए सिरे से वही नीति लागू कर दी। जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
- पिछली सुनवाई में सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट सीएस वैधनाथन उपस्थित हुए और कोर्ट से कहा कि केस की सुनवाई आगे बढ़ाई जाए, क्योंकि सरकार की तरफ से दी गई ओरल अंडरटेकिंग की वजह से प्रमोशन नहीं हो पा रहा है।
यथास्थिति का ऑर्डर होते हुए भी प्रमोशन कैसे
- याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अमोल श्रीवास्तव का कहना है कि गौर करने वाली बात है कि सरकार की तरफ जो जवाब पेश किया है, उसमें बहुत सारे मुद्दे याचिकाकर्ताओं ने उठाए हैं। उस विषय में कोई भी जबाव नहीं दिया गया है, जिसमें क्रीमीलेयर का प्रावधान, बैकलाॅग वैकेंसी के लिए टाइम लिमिट कर दी है।
- आरबी राय के केस में कुछ पदोन्नतियों को असंवैधानिक ठहराया गया था और यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, ऐसे में यथास्थिति का आर्डर होते हुए कैसे प्रमोशन कर सकते हैं।