साल 2008 के मालेगांव बम ब्लास्ट केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर सहित सभी सातों आरोपियों को नोटिस जारी किए हैं। इस ब्लास्ट केस में मारे गए लोगों के परिवारों द्वारा 31 मई को एनआईए कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका दायर
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6 हफ्ते बाद होगी सुनवाई मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंकलद की खंडपीठ ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और महाराष्ट्र सरकार को भी नोटिस जारी किए हैं। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई छह सप्ताह बाद तय की है।
पिछले हफ्ते दायर की गई थी याचिका बता दें कि पिछले सप्ताह बॉम्बे हाईकोर्ट में एक अपील दायर की गई थी। इस अपील में दावा किया गया है कि दोषपूर्ण जांच या जांच में कुछ खामियां आरोपियों को बरी करने का आधार नहीं हो सकतीं। इसके साथ ही तर्क दिया गया कि विस्फोट की साजिश गुप्त रूप से रची गई थी और इसलिए इसका प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं हो सकता है।
याचिका में आरोपियों को बरी करने पर उठाए सवाल याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि विशेष एनआईए कोर्ट का 31 जुलाई को सात आरोपियों को बरी करने का आदेश गलत और कानूनी रूप से अनुचित था और इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए।
17 साल पहले हुआ था मालेगांव में धमाका 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में मुंबई से लगभग 200 किलोमीटर दूर मालेगांव शहर में एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल पर बंधे विस्फोटक उपकरण में ब्लास्ट हो गया था। इस ब्लास्ट में छह लोगों की जान गई थी। इस हादसे में 101 लोग घायल हुए थे।
मालेगांव ब्लास्ट- पूर्व सांसद, लेफ्टिनेंट कर्नल समेत सातों आरोपी बरी
बीते 31 मई को महाराष्ट्र के मालेगांव ब्लास्ट केस में NIA स्पेशल कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा समेत सातों आरोपियों को बरी कर दिया था। इनमें पूर्व भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित, रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकर धर द्विवेदी शामिल थे। पीड़ितों के वकील शाहिद नवीन अंसारी ने कहा- हम एनआईए कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे। इस मामले में जांच एजेंसियां और सरकार फेल हुई है। यहां पढ़ें पूरी खबर…..