श्रीचंद्रमोलेश्वर महादेव मंदिर स्कीम 140 सेक्टर ए में सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा आयोजित की गई। कथा वाचक पं.अतुल शर्मा ने कथा के छठवें दिन पूतना प्रसंग, श्रीकृष्ण की बाल लीला और श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनाया। बरात निकाली, जगह-जगह स्वागत हुआ।
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भागवत कथा में श्रद्धालुओं ने भव्य बरात का आनंद उठाया।
कथा वाचक पं.अतुल शर्मा ने कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान और कंस वध का वर्णन किया। साथ ही महर्षि सांदीपनि के आश्रम में विद्या ग्रहण करने का प्रसंग भी सुनाया। कालयवन वध और उधव-गोपी संवाद का भी उल्लेख हुआ। पंडित जी ने ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाने, द्वारका की स्थापना और रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया। श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह की झांकी ने सभी भक्तों को आनंदित किया। पंडित जी ने कहा कि जो भक्त ईश्वर प्रेम में आनंदित होते हैं और श्रीकृष्ण-रुक्मिणी के विवाह में शामिल होते हैंं, उनकी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया था। महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा और परमात्मा का मिलन हुआ। कथा के अंत में श्रीमद् भागवत कथा की आरती के बाद भक्तों में प्रसाद वितरण किया गया।