मुकेश यादव अध्यक्ष को टोकते हुए
उज्जैन में भाजपा नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल का एक वीडियो सामने आने के बाद सियासी घमासान शुरू हो गया है। इस वीडियो में अग्रवाल भाषण के दौरान “धर्म का नाश हो” कहते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस ने सोमवार को शहीद पार्क में अग्रवाल का पुतला जलाकर विरोध प्रदर्
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कांग्रेस ने इसे धार्मिक आस्था का अपमान बताते हुए कहा कि भाजपा इस बयान पर तत्काल माफी मांगे और नगर अध्यक्ष पर कठोर कार्रवाई करे। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए इसे आपत्तिजनक बताया है।
प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ताओं ने गौमूत्र और गंगाजल से भाजपा कार्यालय को शुद्ध करने के लिए वहां जाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। महेश परमार ने मांग की कि संजय अग्रवाल तत्काल इस्तीफा दें और भाजपा संगठन उन पर कठोर कार्रवाई करे।
कैसे हुआ विवाद?
11 सितंबर को भाजपा नगर कार्यालय लोकशक्ति भवन में नवनियुक्त जिला पदाधिकारियों का स्वागत समारोह था। इसी दौरान भाषण देते हुए संजय अग्रवाल ने कहा “कांग्रेस का सत्यानाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, धर्म का नाश हो।” जैसे ही यह शब्द उनके मुंह से निकले, महामंत्री मुकेश यादव ने उन्हें टोका, लेकिन अग्रवाल ने उन्हें भी बिठा दिया। इसके बाद लोगों की प्रतिक्रिया पर अग्रवाल ने कहा कि “रात को देर से सोया था, गलती हो जाती है।” इसके बाद मंच और सभा में ठहाके गूंज उठे।
भाजपा नगर अध्यक्ष का पक्ष
संजय अग्रवाल ने सफाई देते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष पद की लड़ाई को दबाने के लिए नए मुद्दे गढ़ रही है। उन्होंने कहा, “हाथ में भगवा ध्वज पकड़ना भी हमने कांग्रेस को सिखाया है। लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं।”
कांग्रेस ने कहा भाजपा माफी मांगे-
वीडियो सामने आया तो कांग्रेस को बैठे-बिठाए मौका मिल गया। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर लिखा कि उज्जैन भाजपा के नगर अध्यक्ष द्वारा मंच से “धर्म का नाश हो” जैसा आपत्तिजनक बयान देना न केवल धार्मिक आस्थाओं का अपमान है, बल्कि यह भाजपा की पाखंडी राजनीति की पोल खोलता है।
ये वही नेता हैं जिन्होंने पहले भी महाकाल मंदिर की मर्यादा का उल्लंघन करते हुए, भगवान को भोग लगाने से पहले प्रसाद में उपयोग होने वाली दाल को चख लिया था जो पूरी तरह से धार्मिक परंपराओं के विरुद्ध था। अब वही व्यक्ति खुलेआम धर्म के नाश की बात कर रहा है।
क्या भाजपा ऐसे ही लोगों को हिंदू धर्म का प्रतिनिधि मानती है? क्या यह संगठन के मूल विचारों का हिस्सा है? जब-जब सत्ता के नशे में चूर नेताओं ने धर्म का अपमान किया है, तब-तब जनता ने उन्हें सबक सिखाया है। हम इस मानसिकता की कड़ी निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि भाजपा तत्काल इस बयान पर माफी मांगे और कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करे। धर्म किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं है यह हमारी आस्था है और उसका बार-बार अपमान अब बर्दाश्त नहीं होगा।