खारक बांध से प्रभावित सैकड़ों ग्रामीणों ने गुरुवार को खरगोन शहर में प्रदर्शन करते हुए अपनी समस्याओं को लेकर रैली निकाली। शाम 5 बजे तक चले इस प्रदर्शन के दौरान डूब प्रभावितों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय तक नारेबाजी करते हुए मार्च निकाला और मुख्यमंत्री मोहन
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प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार और सांसद गजेंद्र पटेल ने वर्ष 2023 में जो वादे किए थे, वे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। उनका दावा है कि पुनर्वास के मामलों की सुनवाई शिकायत निवारण प्राधिकरण (GRA) द्वारा की जानी थी और प्रभावितों को उचित मुआवजा और पुनर्वास राशि दी जानी थी, लेकिन अब तक यह सब सिर्फ कागज़ों में ही रह गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं मिला हक
प्रभावित शिवराम कनासे ने बताया कि आठ साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि तीन महीने के भीतर सभी पात्र परिवारों को पुनर्वास राशि प्रदान की जाए, लेकिन आज तक न तो उन्हें न्याय मिला और न ही उनका वैध हक। उन्होंने इसे केवल न्यायालय की अवमानना नहीं, बल्कि आदिवासी परिवारों के साथ सीधा विश्वासघात बताया।
128 मामलों में सुनवाई पूरी, फिर भी नहीं मिला लाभ
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि GRA में 128 मामलों की पूरी सुनवाई हो चुकी है, फिर भी फाइलें दबी हुई हैं। कई मामलों में आदेश पारित हो चुके हैं, लेकिन एक भी परिवार को अब तक पुनर्वास राशि नहीं दी गई है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट का अक्टूबर 2018 का आदेश भी प्रशासन की बेरुख़ी और लापरवाही के चलते आज तक लागू नहीं किया गया।
न्याय की प्रक्रिया रोकने का आरोप
प्रभावितों ने यह भी बताया कि सरकार ने अब तक शिकायत निवारण प्राधिकरण (GRA) के लिए नया पीठासीन अधिकारी नियुक्त नहीं किया है, जिससे जानबूझकर न्याय की प्रक्रिया को रोका जा रहा है। उनका कहना है कि यह कदम सिर्फ प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि सुनियोजित अन्याय का हिस्सा है।
जमीन, घर और आजीविका सब कुछ खो बैठे आदिवासी
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि खारक बांध के कारण उनकी ज़मीनें और घर छीन लिए गए हैं, जिससे आजीविका के साधन खत्म हो गए हैं। कई परिवार पलायन को मजबूर हो गए हैं और बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हुई है। उन्होंने सरकार से मांग की कि जल्द से जल्द GRA के लिए सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश की नियुक्ति की जाए और दो माह के भीतर सभी लंबित मामलों पर निर्णय लेकर पुनर्वास राशि प्रदान की जाए।