मध्यप्रदेश में जहरीले कफ सिरप से हुई बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और औषधि प्रशासन प्रदेशभर में सख्त कार्रवाई कर रहा है। अब तक 243 सिरप के सैंपल जांच के लिए लिए जा चुके हैं। इनमें से तीन सिरप कोल्ड्रिफ, रेस्पिफ्रेश टीआर और री-लाइफ पहले ही असुर
.
जांच में जो सैंपल फेल हुए, उनमें डायएथिलीन ग्लायकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लायकॉल (EG) जैसे रसायन निर्धारित सीमा से कहीं अधिक मात्रा में मिले। ये दोनों रसायन उच्च मात्रा में शरीर के लिए घातक होते हैं और किडनी, लीवर, ब्रेन व नर्वस सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। यही रसायन कोल्ड्रिफ और रेस्पिफ्रेश जैसे सिरप में पाए गए थे। इन्हीं के सेवन से अब तक 24 बच्चों की मौत हो चुकी है।
सिरप की बिक्री पर सख्त पाबंदी एफडीए की ओर से आदेश जारी हुआ है कि सिरप को ओवर-द-काउंटर (OTC) बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही, सभी थोक विक्रेताओं और रिटेलर्स को इन दवाओं की बिक्री के रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। हर एक होलसेलर को अब प्रति माह अधिकतम 1000 बोतलें और रिटेलर को हर महीने 50 बोतलें ही बेचने की अनुमति होगी। साथ ही, राज्य औषधि प्रशासन विभाग ने उन दवाओं पर निगरानी कड़ी कर दी है जिनका नशे के रूप में दुरुपयोग हो रहा है। विशेष रूप से कोडीन घटक युक्त कफ सिरप को लेकर सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
सभी कंपनियों पर बढ़ी निगरानी प्रशासन ने अब तय किया है कि राज्य में ओरल लिक्विड दवा (सिरप) के उत्पादन और बिक्री पर लगातार मॉनिटरिंग की एसओपी बना कर काम किया जाएगा। जिसके तहत लगातार सैंपलिंग की जाएगी। एफडीए (Food and Drug Administration) की जॉइंट कंट्रोलर टीना यादव के अनुसार प्रदेश की सभी फार्मास्युटिकल कंपनियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अब हर कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी बैच की सप्लाई से पहले रॉ-मैटेरियल की क्वालिटी रिपोर्ट अनिवार्य रूप से लैब से प्रमाणित हो।
हर सिरप की DEG-PEG जांच अनिवार्य हो राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि DEG और PEG की जांच सभी ओरल लिक्विड प्रिपरेशन (Oral Liquid Drugs) के लिए अनिवार्य की जाए। इस संबंध में Drug Controller General of India (डीसीजीआई) को औपचारिक पत्र भेजा गया है। अब तक इन केमिकल्स की जांच सिर्फ तब होती थी जब कोई सैंपल संदिग्ध पाया जाता था। लेकिन छिंदवाड़ा जैसी घटनाओं के बाद प्रदेश ने इसे अब रूटीन जांच में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है।
संयुक्त जांच टीम करेगी औचक निरीक्षण राज्य सरकार ने CDSCO (Central Drugs Standard Control Organisation) को भी पत्र लिखा है, ताकि संयुक्त टीम बनाकर राज्य में चल रही दवा निर्माण इकाइयों का औचक निरीक्षण किया जा सके। यह टीम CDSCO सब-जोन इंदौर, राज्य औषधि निरीक्षक और खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों की देखरेख में काम करेगी। इस टीम को यह अधिकार भी होगा कि यदि किसी प्लांट या बैच में गड़बड़ी मिले, तो उसका उत्पादन और वितरण तत्काल रोका जा सके।