टीकमगढ़ की सुभाषपुरम कॉलोनी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दौरान शुक्रवार शाम को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर बुंदेलखंड पीठाधीश्वर महंत सीताराम दास महाराज ने बधाई गीत गाए, जिन्हें सुनकर श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। जन्मोत्सव के
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महंत सीताराम दास महाराज ने कथा के दौरान महाराज ययाति के चंद्रवंशी वंश का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि ययाति के बड़े पुत्र यदु हुए, और उन्हीं के वंश में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्णपक्ष अष्टमी को रात्रि 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में हुआ था।
महंत ने आगे बताया कि श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही कंस के कारागार के द्वार अपने आप खुल गए और वहां मौजूद सभी सैनिक मूर्छित होकर गिर गए। इसके बाद वासुदेव भगवान श्रीकृष्ण को एक टोकरी में रखकर यमुना नदी पार कर नंद बाबा के यहां माता यशोदा की गोद में छोड़ आए। वे वहां से माता यशोदा के यहां जन्मी कन्या को लेकर वापस कारागार आ गए।
कंस को जब अपनी बहन देवकी के आठवें शिशु के जन्म की सूचना मिली, तो वह कारागार पहुंचा। उसने बिना देखे ही उस कन्या शिशु को दीवार पर मारने का प्रयास किया, लेकिन वह कन्या हाथ से ओझल होकर आसमान में पहुंच गई। कन्या ने कंस से कहा कि उसका नाश करने वाला धरती पर जन्म ले चुका है। महंत ने बताया कि भगवान कृष्ण ने संसार को अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश में लाने के लिए जन्म लिया।
कथा में बताया गया कि जब वासुदेव भगवान कृष्ण को यशोदा मैया के घर ले जा रहे थे, तब शेषनाग ने उनके चरणों को स्पर्श किया। इस दौरान पूतना उद्धार की कथा भी सुनाई गई। जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में मेवा, खिलौने सहित कई प्रकार के उपहार और सामग्री श्रोताओं के बीच लुटाई गई। कथा में सीताराम दास महाराज ने एकादशी व्रत सहित अन्य कई कथाओं का भी वर्णन किया। भजनों पर महिलाएं आस्था में डूबकर झूमती नजर आईं।