Jabalpur News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायधीश विनय सराफ की युगलपीठ ने जबलपुर से एयर कनेक्टिविटी को लेकर नाराजगी जाहिर की है. इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहां कि भोपाल को मुख्य प्रशासनिक तो जबलपुर को मुख्य न्यायिक पीठ बनाया गया. फिर, जबलपुर जैसे महत्वपूर्ण शहर के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार क्यों किया जा रहा है?
राजधानी के अधिकारियों का कर देंगे जबलपुर ट्रांसफर..
हाईकोर्ट ने कहा, अगर इसी तरह की स्थिति बनी रही, तब राजधानी भोपाल के आला अधिकारियों का जबलपुर ट्रांसफर कर देंगे. इसके बाद खराब एयर एक्टिविटी का सामना अधिकारियों को करना पड़ेगा. कोर्ट ने यह भी कहा है कि जब फ्लाइट संचालित करनी ही नहीं थी, तब 500 करोड़ रुपए खर्च करने का औचित्य क्या था? इतना ही नहीं, तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, क्या न्यायिक आदेश जारी किया जाए और भोपाल-इंदौर फ्लाइट को जबलपुर से कनेक्ट कराएं?
इस तरह संचालित की जा रही फ्लाइट
मध्य प्रदेश के इंदौर में प्रतिदिन 80 फ्लाइट संचालित की जा रही हैं, जबकि भोपाल में 40, ग्वालियर में 25 और जबलपुर में महज 9 फ्लाइट ही संचालित हैं. लिहाजा, कोर्ट ने असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल को निर्देशित किया कि अगली सुनवाई के पहले एयरपोर्ट के अधिकारी, राज्य सरकार और याचिकाकर्ता के एडवोकेट के साथ संयुक्त बैठक करते हुए निर्णय लें और फिर कोर्ट को अवगत कराएं. बहरहाल, अब अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी.
500 करोड़ खर्च कर बना जबलपुर एयरपोर्ट
जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट को 500 करोड़ रुपये खर्च कर विस्तार किया गया है. लेकिन, अब एयरपोर्ट सफेद हाथी सा बन चुका है. यहां फ्लाइट की संख्या काफी कम हैं. दूसरी तरफ जबलपुर से मुंबई, पुणे, कोलकाता, बेंगलुरु आदि शहरों के लिए सीधी फ्लाइट भी बंद कर दी गई है. लिहाजा, जबलपुर में बाकी शहरों की तुलना में कम फ्लाइट होने पर चुनौती दी गई हैं.