जीवाजी विश्वविद्यालय (जेयू) ने सत्र 2025–26 के लिए 349 कॉलेजों में से 223 कॉलेजों को शर्तों के साथ संबद्धता दे दी है। यह निर्णय परिनियम 27 क्लॉज 10 के नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है। नियमों के मुताबिक जिन कॉलेजों में भवन, शिक्षक, लैब और लाइब्रेरी ज
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इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने “संबंधों के आधार पर संबद्धता” जारी कर दी, जिससे लगभग 1.50 लाख छात्रों का भविष्य जोखिम में पड़ गया है। रजिस्ट्रार डॉ. राकेश कुशवाह इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि पूर्व कुलपति प्रो. अविनाश तिवारी को पहले ही संबद्धता फर्जीवाड़े में बर्खास्त किया जा चुका है।
वहीं, नैक से ए डबल प्लस ग्रेड प्राप्त कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने स्थायी समिति और कार्यपरिषद की बैठक में भी इस मुद्दे पर कोई आपत्ति नहीं जताई। अब यह मामला उच्च शिक्षा विभाग के एसीएस अनुपम राजन तक पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार, विभाग जल्द ही विश्वविद्यालय से जवाब तलब कर सकता है।
विश्वविद्यालय के गलियारों में चर्चा है कि संबद्धता मानकों के आधार पर दी गई या “संबंधों की संबद्धता” थी। इस पूरे प्रकरण ने जेयू की पारदर्शिता और संबद्धता प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- 1.50 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर
- पहली कमेटी की रिपोर्ट दरकिनार कर दूसरे से जांच कराकर जारी की संबद्धता
भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. जयंत सोनवलकर, पूर्व कुलपति, भोज विवि
फर्जी कॉलेज बंद किए बिना गुणवत्ता संभव नहीं
भवन, शिक्षक, लैब और लाइब्रेरी जैसी मूलभूत सुविधाओं के बिना कॉलेजों को संबद्धता देना नियम विरुद्ध है। बीएड के साथ अन्य कोर्स चलाना भी गलत है। जेयू को पहली निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए थी। फर्जी कॉलेज बंद किए बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव नहीं।
शिक्षकों की नियुक्ति नियमों के अनुसार नहीं हुई तो कार्रवाई कार्यपरिषद के निर्णयानुसार जो कॉलेज शिक्षकों की नियुक्ति नियमों के अनुसार नहीं करते, उन पर सत्र 2026-27 से कार्रवाई की जाएगी।’ -डॉ. राजकुमार आचार्य, कुलगुरु, जीवाजी विश्वविद्यालय