‘वर्ल्ड एनेस्थीसिया डे’ के अवसर पर इंडियन सोसायटी ऑफ एनेस्थियोलॉजिस्ट्स (ISA) इंदौर चैप्टर द्वारा गुरुवार को लोगों को जागरूकता का आह्वान किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन में एनेस्थीसिया (बेहोशी की प्रक्रिया) को लेकर फैली गलत धारणाओं को दूर करना औ
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इस अवसर पर शहर के वरिष्ठ एनेस्थीसिया विशेषज्ञों ने एनेस्थीसिया अवेयरनेस विषय पर विस्तृत चर्चा की और बताया कि अब एनेस्थीसिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और वैज्ञानिक हो गया है। आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम और तकनीक ने सर्जरी को मरीजों के लिए अधिक आरामदायक बना दिया है।
ISA इंदौर चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश दूधिया ने कहा एनेस्थीसिया किसी भी सर्जरी का अदृश्य लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज तकनीकी प्रगति के कारण मरीजों को बिना दर्द और डर के उपचार देना संभव है, परंतु समाज में अभी भी कई मिथक हैं। जिन्हें सही जानकारी और संवाद से ही दूर किया जा सकता है।
विशेषज्ञ बोले-आधुनिक तकनीक से प्रक्रिया अब पूरी तरह सुरक्षित
वरिष्ठ एनेस्थेटिस्ट डॉ. राजेन्द्र चौहान ने बताया कि आम जनता में स्पाइनल एनेस्थीसिया को लेकर कई गलतफहमियां प्रचलित हैं। यह धारणा गलत है कि स्पाइनल एनेस्थीसिया से जीवनभर पीठ दर्द रहता है। अब अत्याधुनिक नीडल्स और सटीक तकनीक के कारण यह प्रक्रिया बेहद सुरक्षित है।
डॉ. मीनू चड्ढा ने बताया कि आज एनेस्थेसियोलॉजिस्ट की भूमिका केवल ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं है। हम ICU प्रबंधन, क्रॉनिक पेन कंट्रोल (विशेषकर कैंसर मरीजों के दर्द प्रबंधन) और पेरिऑपरेटिव केयर में भी अहम भूमिका निभाते हैं। मरीजों के सम्पूर्ण स्वास्थ्य की जिम्मेदारी में एनेस्थेसियोलॉजिस्ट की भूमिका लगातार विस्तृत हो रही है।
उन्होंने कहा सर्जरी में एनेस्थीसिया का काफी महत्व है। इसके लिए अब यह जरूरी है कि सर्जरी से पहले मरीज व परिजन सारी स्थिति समझने के लिए एनेस्थेटिस्ट से जरूर मिले। कई बार ऐसा होता है कि मरीज व परिजन मेडिक्लेम को लेकर बीमारियां या पुरानी सर्जरी छिपाते हैं। ऐसे में स्थिति घातक हो सकती है। इसके लिए जरूरी है कि मरीज की मेडिकल से जुड़ी हिस्ट्री सही बताएं।
आईएसए इंदौर चैप्टर ने बढ़ाया समाजसेवा का दायरा
डॉ. सुबोध चतुर्वेदी ने आईएसए इंदौर चैप्टर की सामाजिक गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्था न केवल चिकित्सा सेवा बल्कि समाजसेवा में भी सक्रिय है। इंडियन सोसायटी ऑफ एनेस्थेसियोलॉजिस्ट्स इंदौर चैप्टर ने इंदौर पुलिस, डायल 100 टीम और एमराल्ड स्कूल जैसे संस्थानों को CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) प्रशिक्षण प्रदान किया है, ताकि आमजन आपात स्थिति में जीवन रक्षक उपाय सीख सकें।
डॉ. विकास गुप्ता ने कहा कि आईएसए इंदौर का उद्देश्य नागरिकों में सही समझ विकसित करना है। उन्होंने तीन प्रमुख बिंदु साझा किए।
- एनेस्थीसिया पूरी तरह सुरक्षित है और हर मरीज की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है।
- सर्जरी से पहले मरीज को अपनी मेडिकल हिस्ट्री और एलर्जी की जानकारी एनेस्थेटिस्ट को अवश्य देनी चाहिए।
- खुला संवाद और जागरूकता ही सुरक्षित सर्जरी की कुंजी है।
‘सेफ स्लीप, सेफ सर्जरी’ जन-जागरूकता अभियान की घोषणा
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने एनेस्थीसिया के तीन प्रमुख प्रकार जनरल, रीजनल और लोकल एनेस्थीसिया के बारे में भी बताया और उनके उपयोग, लाभ और सुरक्षा उपायों पर प्रकाश डाला। आईएसए इंदौर चैप्टर ने “सेफ स्लीप, सेफ सर्जरी” नामक जन-जागरूकता अभियान की घोषणा की। इसके तहत आने वाले महीनों में इंदौर और आसपास के शहरों में फ्री काउंसलिंग सेशन्स, स्कूल–कॉलेज अवेयरनेस प्रोग्राम्स और सोशल मीडिया कैंपेन आयोजित किए जाएंगे ताकि आम जनता एनेस्थीसिया को लेकर अधिक जागरूक हो सके।
कार्यक्रम के समापन पर आईएसए इंदौर के सचिव डॉ. फिरोज शाह ने सभी उपस्थित विशेषज्ञों, अतिथियों और मीडिया प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया और इस अभियान को समाजहित में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
डॉ. केके अरोरा को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’
उधर, एक समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 100 एनेस्थेटिस्ट्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ ISA के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश दूधिया द्वारा किया गया। इसमें कुछ महीनों से चल रहे एनेस्थीसिया जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी और समाज द्वारा किए जा रहे जनजागरूकता कामों पर प्रकाश डाला। इसके बाद डॉ. मयंक मसंद द्वारा एक उत्कृष्ट शैक्षणिक सत्र का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. केके अरोरा को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. केके अरोरा को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें सोसायटी के प्रति उनके 40 वर्षों की उत्कृष्ट सेवाओं और समर्पण के लिए प्रदान किया गया। डॉ. अरोरा के उल्लेखनीय योगदान और शानदार शैक्षणिक यात्रा का परिचय डॉ. सुबोध और डॉ. मेघना ने बड़े ही भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत किया। ISA के मानद सचिव डॉ. फिरोज शाह ने आभार माना।