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Balaghat News: त्योहारों पर बालाघाट बस स्टैंड में ट्रैवल ऑपरेटर मनमर्जी किराया वसूलते हैं, जिससे मजदूर और छात्र परेशान हैं. प्रशासन बेखबर है. जानें हालात…
Balaghat News: त्योहार के दिन आते ही ट्रैवल ऑपरेटरों की चांदी हो जाती है. मनमर्जी किराया बढ़ाते हैं और उन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है. इसका खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ता है, जो मजदूरी का काम कर हजारों किलोमीटर दूर से आते हैं. साथ ही उन बच्चों को जो अपने माता-पिता के सपने पूरे करने के लिए सैकड़ों मील इंदौर-भोपाल की तरफ जाते हैं. ऐसे में बस ऑपरेटर्स आम लोगों की जेब पर डाका डालने का काम करते हैं. ऐसे में लोकल 18 की टीम बालाघाट बस स्टैंड पहुंचा और हालात समझने की कोशिश की…
समय था सुबह के साढ़े आठ… हैदराबाद से एक बस आई, जो खचाखच भरी हुई थी. थके हुए परेशान यात्री, न रात में सोया न खाया और किराया भी हर बार से ज्यादा. इस बस में वो लोग भर के आए थे, जो रोजगार की तलाश में मेट्रो शहर की तरफ जाते हैं. लेकिन दिवाली में अपने घर लौटकर आते हैं. ऐसे में धरमू सिंह ने बताया कि लोगों को ठूंस-ठूंस कर भरता है. वह गली में बैठकर आते हैं. आमतौर पर किराया 800 होता है और कम से कम बैठने की सुविधा मिलती है. अब किराया 1000 रुपए था, लेकिन सुविधा बिल्कुल जीरो…
जाने के किराए से आने का किराया चार गुना
वहीं, बालाघाट के लोग आमतौर पर पढ़ाई-लिखाई के लिए भोपाल या इंदौर की तरफ जाते हैं. ऐसे में जब त्योहार का सीजन हो या फिर एग्जाम का, ट्रैवल एजेंसियां आपदा में अवसर बना ही लेते हैं. इससे अपना पेट काट कर बच्चों को पढ़ा रहे पैरेंट्स की जेब पर गहरा असर पड़ता है. लेकिन, दिवाली का समय है, सबको को घर जाने की इच्छा होती है. ऐसे में शिवम राहंगडाले ने बताया कि अभी भोपाल-इंदौर से आने वाली बसों का किराया दो हजार से 2500 रुपए तक किराया लग लग रहा है. अब कई लोग हैं, जो ज्यादा किराया देकर अपने घर की तरफ आ रहे हैं.
स्मार्ट लोगों ने महीने भर पहले किया रिजर्वेशन
इंदौर-भोपाल से आने वाले कुछ लोगों ने महीने भर पहले ही अपना रिजर्वेशन करवा लिया. शिवम राहंगडाले ने बताया कि हर साल बसों के किराए में बढ़ोतरी होती है. वहीं, अपने घर आने में समस्या होती है. ऐसे में स्लॉट खुलते ही मैंने बुकिंग कर ली थी. हालांकि, वो भी बड़ी मुश्किल से मिला. जल्दी ही पूरी बस भर गई थी.
नियमों का उल्लंघन, प्रशासन बेखबर
बसों में यात्रियों को ठूस-ठूसकर लाया गया. वहीं, बसों में इमरजेंसी एग्जिट की सुविधा थी. दीवाली सहित अन्य त्योहारों में ऐसी ही बनती है. बावजूद इसके आरटीओ मलाई-मिठाई खाकर गहरी नींद में सोया है. इस मामले में जिला परिवहन अधिकारी अनिमेश गढ़पाल से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया.
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें