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Indore Hingot war: दिवाली के दूसरे दिन इंदौर से 55 किलोमीटर सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया जाता है. हजारों की संख्या में लोग इस नजारे को देखने जाते हैं. दो पक्ष एक दूसरे पर अग्निबाण छोड़ते हैं. जानें परंपरा…
रिपोर्ट: मिथिलेश गुप्ता
हर साल 15 से 20 हजार दर्शक इसकी साक्षी बनते हैं, जो इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, महू, बड़नगर सहित आसपास के इलाकों से आते हैं. इस आयोजन की खासियत यह है कि इसका कोई आयोजक या प्रायोजक नहीं होता, फिर भी प्रशासन पूरी तैयारी करता है. करीब 200 पुलिसकर्मी, तीन-चार एंबुलेंस, 50 से ज्यादा स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर और कर्मचारी, फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और नगरीय प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहेंगे. पिछले वर्षों में इस युद्ध में घायल होने की घटनाएं आम रही हैं, जैसे 2024 में 28 लोग घायल हुए थे.
ऐसे होता है युद्ध
योद्धा जंगल से हिंगोनिया पेड़ के फल तोड़कर लाते हैं, जो बाहर से कठोर और अंदर से मुलायम होते हैं. इन्हें छीलकर, सुराख करके गुदा निकालते हैं, सुखाते हैं और बारूद भरते हैं. बड़े सुराख पर पीली मिट्टी की डाट लगाते हैं, दूसरे छोर पर गंधक लगाते हैं और तीर जैसी लकड़ी बांधते हैं. योद्धा एक हाथ में ढाल, कंधे पर हिंगोट से भरा झोला और जलती लकड़ी लेकर मैदान में उतरते हैं. 100 फीट की दूरी पर दोनों दल के 40 से ज्यादा योद्धा सिग्नल मिलते ही युद्ध शुरू करते हैं, जो करीब डेढ़ घंटे चलता है.
हजारों में होंगे दर्शक
यह परंपरा पौराणिक युद्धों की याद दिलाती है और गांववासियों की पहचान बनी हुई है. हालांकि, इसमें जोखिम ज्यादा है, इसलिए प्रशासन सख्त सुरक्षा इंतजाम करता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह त्योहार भाईचारे को मजबूत करता है. आज के युद्ध के लिए सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और हजारों लोग इस रोमांच का आनंद लेने पहुंच रहे हैं.
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें