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Khandwa Street Food: खंडवा में राजू सेनी 30 साल से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले “दाल पकवान” का ठेला लगा रहे हैं. कभी 200 रुपये उधार लेकर शुरू किया गया ये काम आज बढ़िया मुनाफा दे रहा है. पूरे शहर में उनकी पहचान बन चुकी है.
Khandwa News: मध्य प्रदेश के खंडवा की एक भीड़भाड़ वाली गली में रोज सुबह एक ठेला सजता है. ठेले से उठती दाल पकवान की खुशबू पूरे मोहल्ले में फैल जाती है. लोग दूर-दूर से सिर्फ एक कटोरी दाल और करारे पकवान खाने आते हैं. यह कोई साधारण ठेला नहीं है, बल्कि स्वाद, मेहनत और परंपरा की कहानी है. इस ठेले की शुरुआत करीब 30 साल पहले राजू सेनी ने की थी, जो 55 साल के हैं. राजू सेनी बताते हैं कि उन्होंने यह काम बहुत छोटे स्तर पर शुरू किया था. घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, तो उन्होंने अपनी मां से 200 रुपये उधार लेकर सड़क किनारे ठेला लगाया. शुरू-शुरू में रोज कुछ ही ग्राहक आते थे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी.
राजू सेनी की इस मेहनत का असर यह हुआ कि अब खंडवा में “राजू दाल पकवान वाले” के नाम से हर कोई उन्हें जानता है. बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक उनके रेगुलर ग्राहक हैं. कई लोग तो कहते हैं कि जब तक राजू की दाल पकवान न खा लें, दिन की शुरुआत ही अधूरी लगती है.
चेंज कर दी पैकिंग स्टाइल
राजू सेनी की इस सफलता के पीछे सिर्फ उनका स्वाद नहीं, बल्कि उनका इमानदार व्यवहार भी है. वे हमेशा ग्राहकों से मुस्कुराकर बात करते हैं. उनके ठेले पर गरीब से गरीब व्यक्ति भी आत्मसम्मान के साथ खाना खा सकता है. अब उनके बेटे ललित सेनी ने भी इस काम को संभाल लिया है. उन्होंने अपने पिता के पारंपरिक स्वाद को बरकरार रखते हुए थोड़ा मॉडर्न टच दिया है. ललित बताते हैं, “पापा ने जो पहचान बनाई है, उसे हम आगे बढ़ाना चाहते हैं. अब हमने स्टील के बर्तनों की जगह पैकिंग वाले बॉक्स शुरू किए हैं, ताकि ऑफिस या घर तक भी खाना आसानी से पहुंच सके.”
रोज मेन्यू अपडेट
ललित की इस नई सोच से कारोबार और भी बढ़ गया है. अब खंडवा के अलावा आसपास के छोटे कस्बों से भी लोग ऑर्डर देने लगे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर भी “राजू दाल पकवान” का पेज बनाया है, जहां रोज़ सुबह ठेले की तस्वीरें और मेन्यू अपडेट किया जाता है. राजू सेनी का मानना है कि स्वाद की असली पहचान मेहनत और ईमानदारी से बनती है. वे कहते हैं, “हमारे दाल पकवान में कोई महंगा इंग्रेडिएंट नहीं, लेकिन प्यार जरूर है.” यही वजह है कि 30 साल बाद भी उनका ठेला उतनी ही भीड़ खींचता है, जितनी पहले दिन थी. 40 रुपये की प्लेट दाल पकवान का मुकाबला कोई नहीं कर पाता.
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें