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क्रिकेटर सरफराज खान के इंडिया ए टीम में चयन न होने पर असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने सवाल उठाए. शमा मोहम्मद ने तो इसे धर्म से जोड़ दिया. लेकिन अगर वे जहीर खान, इरफान पठान, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद अजहरुद्दीन के बारे में थोड़ा भी सोचे होते तो समझ जाते कि क्रिकेट में परफॉर्मेंस ही मायने रखती है, न कि धर्म.
जो डर था वही हुआ. क्रिकेट जैसा खेल, जहां सिर्फ बल्ला और गेंद बोलते हैं, वहां अब हिंदू-मुस्लिम की राजनीति घुस गई. युवा क्रिकेटर सरफराज खान को इंडिया टीम A में जगह न मिलने पर असदुद्दीन ओवैसी ने चिंगारी लगाई, और अब कांग्रेस की प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने जैसे पेट्रोल डाल दिया. सवाल ये उठ रहा है कि क्या सरफराज को सिर्फ मुस्लिम होने की वजह से टीम से बाहर रखा जा रहा है? लेकिन क्रिकेट में धर्म का क्या काम? क्यों हर चीज में हिंदू-मुस्लिम ढूंढा जाता है, जहां सिर्फ परफॉर्मेंस मायने रखती है?