OPINION: जो डर था वही हुआ, ओवैसी ने चिंगारी लगाई, अब क‍िसने डाला पेट्रोल, सरफराज पर हिंदू-मुस्लिम क्‍यों?

OPINION: जो डर था वही हुआ, ओवैसी ने चिंगारी लगाई, अब क‍िसने डाला पेट्रोल, सरफराज पर हिंदू-मुस्लिम क्‍यों?


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क्रिकेटर सरफराज खान के इंडिया ए टीम में चयन न होने पर असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस प्रवक्‍ता शमा मोहम्मद ने सवाल उठाए. शमा मोहम्‍मद ने तो इसे धर्म से जोड़ द‍िया. लेकिन अगर वे जहीर खान, इरफान पठान, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद अजहरुद्दीन के बारे में थोड़ा भी सोचे होते तो समझ जाते क‍ि क्रिकेट में परफॉर्मेंस ही मायने रखती है, न कि धर्म.

सरफराज खान पर ओवैसी और शमा मोहम्‍मद ने नई धुन छेड़ दी है.

जो डर था वही हुआ. क्रिकेट जैसा खेल, जहां सिर्फ बल्ला और गेंद बोलते हैं, वहां अब हिंदू-मुस्लिम की राजनीति घुस गई. युवा क्रिकेटर सरफराज खान को इंडिया टीम A में जगह न मिलने पर असदुद्दीन ओवैसी ने चिंगारी लगाई, और अब कांग्रेस की प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने जैसे पेट्रोल डाल दिया. सवाल ये उठ रहा है कि क्या सरफराज को सिर्फ मुस्लिम होने की वजह से टीम से बाहर रखा जा रहा है? लेकिन क्रिकेट में धर्म का क्या काम? क्यों हर चीज में हिंदू-मुस्लिम ढूंढा जाता है, जहां सिर्फ परफॉर्मेंस मायने रखती है?

सबसे पहले सरफराज की बात करते हैं. ये लड़का मुंबई से है, पिता नौशाद ने उसे क्रिकेट की एबीसीडी सिखाई. सरफराज का डोमेस्टिक रिकॉर्ड देखो तो आंखें चौंधिया जाती हैं. रणजी ट्रॉफी में बैक-टू-बैक सीजन में 900 से ज्यादा रन, एवरेज 100 के पार. 2021-22 में तो 982 रन बनाए, अगले साल भी 556. ऐसा परफॉर्मेंस कि लगता था, टीम इंडिया की दरवाजे खुद-ब-खुद खुल जाएंगे. लेकिन नहीं, सालों तक इंतजार करवाया गया. 2023 में वेस्टइंडीज सीरीज के लिए नहीं चुना गया, तो हंगामा मचा. लोग कहने लगे, फिटनेस इश्यू है, ऑफ-फील्ड कंडक्ट ठीक नहीं. लेकिन सरफराज ने मेहनत की, वजन कम किया, फिटनेस सुधारी. आखिरकार फरवरी 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू मिला. पहली इनिंग में 62, फिर 68 नॉटआउट– क्या डेब्यू था! ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी खेला, लेकिन अब 2025 में इंडिया ए स्क्वॉड से बाहर कर द‍िए गए. सवाल उठे क‍ि सरफराज को क्‍यों नहीं चुना गया? क्या फॉर्म खराब है? नहीं, हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट में खेला था, लेकिन परफॉर्मेंस ठीक-ठाक थी. ये बात तो हुई क्रिकेट की…



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