दिवाली के पर्व के दौरान कार्बाइड गन और पटाखों से आंखों में चोट के 30 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। इन घायलों का इलाज इंदौर में किया जा रहा है, जिनमें देवास, उज्जैन, बड़नगर, सांवेर और महेश्वर के मरीज भी शामिल हैं। इस स्थिति को गंभीर मानते हुए शुक्रवार
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यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम, 2023 की धारा 163 के तहत जारी किया गया है, जो 22 दिसंबर 2025 तक प्रभावी रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने बताया कि ये उपकरण आमतौर पर कैल्शियम कार्बाइड और पीवीसी पाइपों से बनाए जाते हैं, जो जलने पर तेज धमाका करते हैं और जानलेवा साबित हो सकते हैं।
इस गन को घरेलू तरीके से बनाया जाता है। यह 100-200 रुपए में बिक रही थी।
कार्बाइड गन से 30 से ज्यादा घायल
कलेक्टर ने कहा ऐसी गतिविधियां मानव जीवन और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। किसी भी व्यक्ति या व्यापारी को कार्बाइड गन बनाने या बेचने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने पुलिस और सभी एसडीएम को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
डॉ. माधव हसानी (सीएमएचओ) ने बताया कि दीपोत्सव के दौरान इंदौर और आसपास के जिलों में कार्बाइड गन से जुड़ी 30 से ज्यादा आंखों की चोटों के मामले सामने आए। इनमें देवास का 9 वर्षीय बालक, उज्जैन के कई किशोर, बडनगर, सांवेर और महेश्वर के के लोगों की आंखों भी चोटें आईं।
कुल मामलों में से 22 मरीजों का इलाज रोहित आई हॉस्पिटल, डॉ. अग्रवाल आई हॉस्पिटल, रेटिना आई हॉस्पिटल, आनंदम नेत्रालय और शंकरा आई सेंटर में किया गया जबकि 9 मरीजों को एमवाय हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। एक मरीज अभी भी एमवाय अस्पताल में एडमिट है जबकि अन्य सभी को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।
डॉ. हसानी ने बताया कि कार्बाइड गन से एसिटिलीन गैस निकलती है, जो जलने पर तेज विस्फोट करती है। उन्होंने कहा बच्चे अक्सर पाइप को चेहरे के बहुत पास रखते हैं, जिससे आंखों और चेहरे पर गंभीर चोटें लगती हैं।
पुलिस की सख्त कार्रवाई शुरू
कलेक्टर के निर्देश के बाद इंदौर पुलिस ने पूरे शहर में व्यापक अभियान शुरू किया है। पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इन उपकरणों का मौजूदा स्टॉक जब्त करें और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई करें। बाजारों में छापेमारी जारी है ताकि कोई व्यापारी दोबारा इन खतरनाक उपकरणों की बिक्री न कर सके।
बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार ने सभी जिलों को इस प्रतिबंध का कड़ाई से पालन कराने और रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस संबंध में घायलों की संख्या और उनके उपचार की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। वर्तमान में इंदौर में कोई मामला गंभीर नहीं है, लेकिन प्रत्येक मरीज का लगातार फॉलोअप किया जा रहा है।
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दिवाली पर पटाखों के विकल्प में चलाई गई देसी कार्बाइड गन से मध्य प्रदेश में अब तक 300 लोगों की आंखें जख्मी हुई हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार, करीब 50% मरीजों की आंखों की रोशनी फिलहाल जा चुकी है। इनकी आंखों के सामने सिर्फ वार्म व्हाइट लाइट का गोला ही नजर आ रहा है। पूरी खबर पढ़ें…