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कटनी जिले के बाकल थाने में तैनात कॉन्स्टेबल अवधेश मिश्रा थाने पर हुए हमले के मंजर को इस तरह बयां करते हैं। वह बताते हैं, ‘वो 40 से ज्यादा लोग थे और हम लोग केवल तीन। हम लोगों ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने प्रधान आरक्षक के के शुक्ला के साथ मारपीट की जिसमें वो गंभीर रूप से घायल हो गए। मैडम( थाना प्रभारी) आईं तो उनके साथ भी धक्का मुक्की की।’
दरअसल, 22 अक्टूबर की रात कटनी जिले के बाकल थाने पर भीड़ ने हमला कर दिया था। पुलिस का कहना है कि इसमें करणी सेना के पदाधिकारी शामिल थे। पुलिस ने 5 नामजद लोगों के साथ 40 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं करणी सेना ने पुलिस के आरोपों को निराधार बताया है। घटना के तीन दिन बाद एसपी ने थाना प्रभारी रश्मि सोनकर को सस्पेंड कर दिया है।
आखिर क्या था ये पूरा मामला? थाने पर हमला करने वाले कौन थे? ये जानने के लिए भास्कर की टीम पहुंची कटनी से 70 किमी दूर बाकल कस्बे। यहां पुलिसवालों के साथ उन लोगों से भी बात की जिनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। पढ़िए ये ग्राउंड रिपोर्ट
कटनी के बाकल कस्बे का थाना एक किराए के भवन में चलता है।
कॉन्स्टेबल मिश्रा बोले- वो मंजर डरावना था भास्कर की टीम जब बाकल थाने पहुंची तो ड्यूटी पर तैनात मिले कॉन्स्टेबल अवधेश मिश्रा। 22 अक्टूबर की रात वह ड्यूटी पर मौजूद तीन पुलिसकर्मियों में से एक थे। उस रात की घटना को याद करते हुए उन्होंने बताया, ‘रात के करीब साढ़े नौ बजे थे। हम तीन लोगों का स्टाफ ही थाने में था। तभी कुछ लोग एक लड़के लकी सोनी को लेकर आए।
उसने बताया कि किसी ने फोन पर उसे गाली दी और जान से मारने की धमकी दी है। हमारे प्रधान आरक्षक के.के. शुक्ला जी उसकी रिपोर्ट लिख ही रहे थे, तभी थाने पर भीड़ आ पहुंची। भीड़ इस बात पर अड़ गई कि रिपोर्ट थाना प्रभारी रश्मि सोनकर ही लिखेंगी। शुक्ला जी ने उन्हें समझाया कि मैडम घर पर हैं, आ जाएंगी, तब तक मैं रिपोर्ट लिख लेता हूं। लेकिन वे लोग मानने को तैयार नहीं थे।
उनमें से कई लोग शराब के नशे में धुत लग रहे थे। अचानक उन्होंने शुक्ला जी के साथ गाली-गलौज की और फिर उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। 40 लोगों की भीड़ के सामने हम तीन लोग बेबस थे। उन्होंने शुक्ला जी को इतना पीटा कि वह नीचे गिर गए।

मारपीट की मामूली घटना से हुई शुरुआत इस घटना के तीन बाद 25 अक्टूबर को एसपी कटनी ने टीआई रश्मि सोनकर को निलंबित कर दिया है। निलंबन से पहले भास्कर ने जब उनसे बात की तो उन्होंने बताया कि 19 अक्टूबर की रात कुणाल राजपूत नाम के एक युवक ने दो लोगों के खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज कराई थी। हमने तुरंत एफआईआर लिख ली।
20 अक्टूबर को करणी सेना के कुछ पदाधिकारी थाने आए और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे। हमने उन्हें आश्वासन दिया कि जल्द ही कार्रवाई होगी। दिवाली में कानून व्यवस्था में ड्यूटी की वजह से गिरफ्तारी नहीं हो सकी, लेकिन 22 अक्टूबर को हमने इस मामले के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
इसके बावजूद, करणी सेना के लोगों ने दोपहर में फिर थाने आकर नारेबाजी की और चक्काजाम कर दिया। जब हमने समझाइश दी तो वो लोग मान गए और अपना आंदोलन खत्म करके चले गए।

ये तस्वीर 22 अक्टूबर दोपहर की है जब करणी सेना ने थाने पर आकर प्रदर्शन किया था।
टीआई बोलीं- ये हमला सुनियोजित था इसी दिन रात को थाने पर हुए हमले की घटना पर वह कहती हैं, मैं घर पर ही थी, जब बाहर से तेज हंगामे की आवाजें आने लगीं। मैं घर के कपड़ों में ही बाहर निकली तो देखा कि थाने में भीड़ हंगामा कर रही है। मेरी नजर के.के. शुक्ला पर पड़ी, जिन्हें भीड़ बेरहमी से पीट रही थी। मैं उन्हें बचाने के लिए भीड़ में घुस गई।
मैंने चिल्लाकर लोगों को रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मेरे साथ भी धक्का-मुक्की की। जब शुक्ला जी बेहोश होकर गिर गए, तब वे लोग हटे। मैंने तुरंत सीनियर अधिकारियों को सूचना दी और शुक्ला जी को अस्पताल भिजवाया। रश्मि सोनकर का मानना है कि यह हमला सुनियोजित था। जिस लकी सोनी की एफआईआर को लेकर यह विवाद हुआ, उसकी शिकायत तो लिखी जा रही थी।

पुलिस ने 5 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया इस मामले में पुलिस ने 5 नामजद आरोपियों – शक्ति सिंह, भास्कर राजपूत, संतोष विश्वकर्मा, डॉ. प्रजापति और निखिल ताम्रकार – के साथ-साथ 35-40 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं में केस दर्ज किया है। कटनी के एएसपी संतोष कुमार डेहरिया ने बताया, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामला दर्ज किया है। इसकी जांच स्लीमनाबाद थाने के उप-निरीक्षक किशोर द्विवेदी को सौंपी गई है। फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

आरोपी बोले- पुलिस ने हमें पीटा और खुद फाड़ी अपनी वर्दी पुलिस के दावों के ठीक उलट, नामजद आरोपी शक्ति सिंह की कहानी कुछ और ही है। शक्ति सिंह का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ बर्बरता की। उन्होंने कहा- गांव का लकी सोनी डरा हुआ मेरे पास आया था। उसने बताया कि एक मुस्लिम लड़के ने उसे फोन पर काट डालने की धमकी दी है।
हम उसकी शिकायत लिखवाने थाने गए तो पुलिस ने हमसे कहा कि तुम लोग बहुत नेता बनने लगे हो। उन्होंने मुझे, भास्कर और लकी को पकड़कर अंदर बंद कर दिया और बेरहमी से पीटा। जब मैं बेहोश हो गया, तो एक पुलिस वाला खुद बेहोश होने का नाटक करने लगा। पुलिस वालों ने खुद को मारा, अपनी ड्रेस फाड़ी और इल्जाम हम पर लगा दिया। यह सरासर झूठ है। मैं इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करता हूं।
एक अन्य आरोपी संतोष प्रजापति खुद को बेकसूर बताते हुए कहा कि उस दिन मेरी बच्चियों का जन्मदिन था। मैं थाने के सामने से गुजर रहा था तो कुछ लोगों को खड़े देखा। मैं भी वहीं रुक गया। एक पुलिस वाले ने मुझसे मेरे पासपोर्ट के बारे में पूछा और मैं घर आ गया। उस वक्त वहां सब शांत था। फिर भी मेरा नाम एफआईआर में डाल दिया गया। मुझे जबरन फंसाया जा रहा है।

भीड़ के हमले के बाद घायल हेड कॉन्स्टेबल केके शुक्ला को अस्पताल ले जाते साथी पुलिसकर्मी।
करणी सेना के पदाधिकारी बोले- यह हमें बदनाम करने की साजिश इस पूरे मामले में करणी सेना का नाम आने के बाद संगठन ने भी अपना पक्ष रखा है। करणी सेना के संभागीय प्रवक्ता शैलेन्द्र सिंह बघेल ने 22 अक्टूबर की रात की घटना में संगठन की किसी भी भूमिका से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा, 19 अक्टूबर के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए करणी सेना ने शांतिपूर्ण आंदोलन किया था।
22 अक्टूबर की दोपहर को जब आरोपी गिरफ्तार हो गए और पुलिस ने हमें समझाया, तो हमने आंदोलन समाप्त कर दिया था। हमारे सभी पदाधिकारी कटनी वापस आ गए थे। 23 अक्टूबर को हमें मीडिया से पता चला कि थाने में मारपीट हुई है और उसमें करणी सेना का नाम घसीटा जा रहा है।
बघेल ने इस मामले की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि थाने में कैमरे लगे हैं। उनकी डीवीआर जब्त कर जांच की जाए कि उस रात वहां कौन लोग थे। हमें बदनाम करने के लिए यह झूठ फैलाया जा रहा है। हम वर्दी का सम्मान करते हैं। अगर ऐसी कोई घटना हुई है, तो अपराधी चाहे मेरा भाई ही क्यों न हो, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
