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Agriculture News: किसान भक्त प्रह्लाद राहंगडाले ने पराली के निपटारे के बारे में बताते हुए लोकल 18 से कहा कि अगर किसान भाई कंबाइन थ्रेशर या हार्वेस्टर का इस्तेमाल करते हैं, तो धान की उपज तो कम मेहनत में मिल जाती है लेकिन समस्या पराली की रह जाती है. ऐसे में किसान खेत में आग लगा देते हैं, जो पूरी तरह गलत है.
बालाघाट. धान की खेती अब अंतिम पड़ाव पर है. ऐसे में किसान भाई इसे काटने की तैयारी कर रहे हैं. एक समस्या है, जो सिर्फ किसानों की नहीं है बल्कि आम लोगों की है और इससे पर्यावरण भी प्रभावित होता है. दरअसल किसान आमतौर पर धान की कटाई के बाद रबी की तैयारी में लग जाते हैं लेकिन रबी की फसल बोने की जल्दबाजी में पराली को आग लगाकर नष्ट करते हैं. इसके धुएं से न सिर्फ वायु प्रदूषण होता है बल्कि मृदा में मौजूद सूक्ष्म जीव भी नष्ट होते हैं. इसमें किसान मित्र केंचुआ भी शामिल है, जो मिट्टी को भुरभुरी बनाता है और भूमि उपजाऊ बनाए रखने में मदद करता है. ऐसे में हम किसान भाइयों को पराली से बनने वाली खाद के बारे में बता रहे हैं, जिसे न सिर्फ वे अपने खेत में इस्तेमाल कर सकते हैं बल्कि इसे बेचकर मुनाफा भी कमा सकते हैं.
इस घोल की पड़ेगी जरूरत
उन्होंने कहा कि एक ड्रम में पानी लेना है, जिसमें गुड़ और चने के बेसन के घोल के साथ 20 ग्राम बायो डी-कंपोजर को भी मिलाकर अच्छी तरह से चला दें. इस घोल को 2 से 3 दिनों तक सुबह और शाम लगभग 5 से 10 मिनट तक चलाते रहें. करीब तीन दिन में वह घोल तैयार हो जाएगा.
धान की पराली से खाद का बिजनेस
उन्होंने आगे कहा कि सबसे पहले धान की पुआल यानी पराली को एक जगह पर इकट्ठा करें. फिर एक परत पराली की उस पर घोल का छिड़काव करें. ऐसी ही लगातार परत बना सकते हैं. इसमें आप केंचुआ भी डाल सकते हैं, जो इसके विघटन में मदद करेगा. 15 से 20 दिन में यह खाद तैयार हो जाएगी.
300 रुपये की एक बोरी
उन्होंने कहा कि अब तैयार हुई खाद को एक बड़े छनने से छान लें. फिर 30 किलो खाद को एक बोरी में पैक कर लें. इसकी कीमत 10 रुपये प्रति किलो की होती है, यानी एक बोरी 300 रुपये की होगी. इसी दर से आप किसान भाइयों को या फिर कृषि केंद्रों पर इसे बेच सकते हैं. इससे किसानों को पराली से छुटकारा तो मिलेगा ही, साथ ही आप इसका इस्तेमाल अपने खेत में भी कर सकते हैं. अगर आप इसे बेचना चाहें, तो बेचकर अतिरिक्त आय भी हासिल कर सकते हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.