मैहर में सूर्य उपासना का महापर्व छठ धूमधाम से मनाया जा रहा है। सोमवार शाम को व्रतधारी महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। यह अर्घ्य बच्चों और पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए दिया गया।
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मैहर में मां शारदा मंदिर के पास बंधा नदी और सोनवारी में टमस नदी के घाटों पर विशेष सजावट की गई थी। दीपों और लाइटों से जगमगाते घाटों पर छठ मैया की पूजा का उल्लास देखते ही बन रहा था।
ढलते सूर्य की लालिमा युक्त किरणें घाटों पर पड़ रही थीं, जिससे दृश्य और भी मनमोहक हो गया।
सूर्य देव का विधि-विधान से पूजन किया
छठ पूजा के तीसरे दिन सोमवार शाम को सूर्य देव का विधि-विधान से पूजन किया गया। व्रतियों ने बांस की टोकरियों और सूप को फल, ठेकुआ, चावल के लड्डू और अन्य पूजा सामग्री से सजाया। सूर्यास्त से कुछ समय पहले, सूर्य देव की पूजा के बाद अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर पांच बार परिक्रमा की गई।
इस अवसर पर घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने छठी मैया की उपासना कर अपने पुत्रों और परिवार की सलामती की दुआएं मांगीं। पूजन के दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को टीका लगाकर परंपरा का निर्वहन किया।
लोक आस्था के इस महापर्व पर तालाब और नदी के किनारे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। मिर्जापुर के विजय द्विवेदी ने मधुर भोजपुरी लोकगीतों से श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। शाम 4 बजे से शुरू हुआ यह गीत-संगीत कार्यक्रम देर शाम तक चला, जिसमें सूर्य देव की महिमा का गुणगान किया गया।

व्रतधारी महिलाओं का 36 घंटे का निर्जला उपवास सोमवार को भी जारी रहा। वे मंगलवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करेंगी। इस अंतिम अर्घ्य के साथ ही महापर्व छठ का समापन होगा, जिसके बाद ठेकुआ और फल प्रसाद के रूप में वितरित किए जाएंगे।