सीहोर स्थित आरएके कृषि महाविद्यालय में 30 अक्टूबर को राज्यपाल मंगूभाई पटेल नवनिर्मित कन्या छात्रावास भवन व एरोपोनिक्स इकाई का लोकार्पण करेंगे।
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इस मौके पर आयोजित लोकार्पण समारोह में किसान कल्याण और कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना तथा कुलगुरु डाॅ. अरविंद कुमार शुक्ल भी शामिल होंगे। कार्यक्रम 30 अक्टूबर को सुबह 10 बजे आयोजित किया जाएगा।
महाविद्यालय में एरोपोनिक्स तकनीक से आलू की पैदावार की जानी है। जिसे पूसा संस्थान दिल्ली में प्रदर्शनी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वासु के इस नवाचार को देखा और सराहा। पीएम ने इस तकनीक से तैयार बीज को जैन आलू नाम से संबोधित किया था।
वासु शुक्ला ने बताया कि नियंत्रित वातावरण में बिना मिट्टी के आलू बीज का उत्पादन करने के साथ इसे देश में कई राज्यों और विदेश में भी बेच रहे हैं। साथ ही किसानों को भी खेती की इस आधुनिक तकनीक का प्रयोग करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
इस तकनीक से में पौधों की जड़ें मिट्टी या पानी में नहीं, बल्कि पोषक तत्वों से युक्त हवा से पोषण लेती हैं। इस तकनीक में कम पानी, कम जगह और बिना रोगों के बीज उत्पादन संभव है।
पूरी तरह नियंत्रित वातावरण में किया उत्पादन विशेषज्ञ कहते हैं कि हमने आलू बीज उत्पादन को पूरी तरह नियंत्रित वातावरण में किया है। इससे न केवल उत्पादन बढ़ा, बल्कि बीज की गुणवत्ता भी कई गुना बेहतर हुई।
इस तकनीक को लेकर बताया जा रहा है कि इसमें पहले आलू के सीड तैयार करते हैं, वह एक तरह के छोटे आलू ही होते हैं।
एक आलू से लगभग 12 आलू निकलते हैं, जो बढ़ते जाते हैं। एक सीट करीब छह से सात रुपए का जाता है। इस सीड को किसान अपने खेत में लगाने के बाद सीड की जनरेशन तैयार करना है।