फाइल फोटो पीड़ित के भर्ती के समय की।
भिंड जिले के सुरपुरा में दलित युवक से मारपीट और कथित रूप से जबरन पेशाब पिलाने के चर्चित मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ग्वालियर खंडपीठ ने एक आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि यह गंभीर अपराध है, इसलिए आरोपी को इस स्तर पर कोई राहत नहीं
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यह पूरा मामला भिंड जिले के सुरपुरा क्षेत्र का है, जहां 20 अक्टूबर को दलित समाज के पीड़ित ज्ञान सिंह जाटव के साथ मारपीट कर उसे जबरन पेशाब पिलाने की घटना हुई थी। पुलिस ने घटना के बाद कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों- सोनू बरुआ, आलोक शर्मा और छोटू को गिरफ्तार किया। इनके खिलाफ अपहरण, मारपीट और SC-ST एक्ट की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट खंडपीठ ग्वालियर ने याचिका की खारिज।
अभियुक्त आलोक शर्मा की जमानत याचिका खारिज
आरोपी आलोक शर्मा की ओर से हाईकोर्ट ग्वालियर बेंच में वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने जमानत के लिए पैरवी की। अदालत ने कहा कि अपराध की प्रकृति गंभीर है, इसलिए इस चरण में जमानत नहीं दी जा सकती।
पीड़ित ने बताया- बंदूक की नोक पर उठाकर मारपीट की
ड्राइवर पीड़ित ज्ञान सिंह ने बताया कि 18 अक्टूबर को आरोपी सोनू बरुआ ने उसे अपनी गाड़ी पर काम करने को कहा। उसने इनकार कर दिया क्योंकि आरोपी आपराधिक प्रवृत्ति के हैं। आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने उसे बंदूक की नोक पर घर से उठाया, मारपीट की और जबरन पेशाब पिलाई।
पीड़ित ने बयान में कहा, ’18 अक्टूबर को आरोपी ने ड्राइवर बनने को कहा था। मना करने पर बंदूक की नोक पर ले जाकर मेरे साथ मारपीट कर जबरन पेशाब पिलाई।’
पीड़ित के वकील ने कहा कि यह घटना दलित उत्पीड़न की एक नजीर है और न्यायालय का यह फैसला समाज में एक मजबूत संदेश देगा कि ऐसे अपराधियों को कोई राहत नहीं मिलेगी।