15 साल पहले वेलंटाइन डे पर गंभीर और मोर्कल के बीच क्या हुआ था

15 साल पहले वेलंटाइन डे पर गंभीर और मोर्कल के बीच क्या हुआ था


नई दिल्ली. 15 साल पहले वेलंनटाइन डे यानि 14 फरवरी से कोलकाता के ईडेन गार्डेंस में एक ऐसा टेस्ट मैच खेला गया जिसकी जीत ने भारतीय टीम को टेस्ट में बेस्ट बना दिया था. भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच होने वाले टेस्ट मैच से एक दिन पहले, यह सही समय है 2010 के उसी मुकाबले को याद करने का  वह मैच जिसने कुछ शानदार प्रदर्शन देखे और भारत को विश्व टेस्ट रैंकिंग में नंबर 1 स्थान बनाए रखने में मदद की. मजे की बात देखिए तब भी सामने टीम दक्षिण अफ्रीका थी.

भारत ने एक ऐसी स्थिति से वापसी की थी जहाँ जीत लगभग असंभव लग रही थी. दक्षिण अफ्रीका को मैच की आखिरी दिन पूरी तरह दबाव में ला दिया गया था. समय कम था, और भारत को मैच जीतना ही था ताकि सीरीज़ बराबर हो सके. दक्षिण अफ्रीका ने नागपुर में पहला टेस्ट जीत लिया था, और अगर कोलकाता का मैच ड्रॉ हो जाता, तो वे सीरीज़ जीत जाते साथ ही भारत का नंबर 1 ताज भी छिन जाता इसलिए इस मुकाबले का महत्व बहुत बड़ा था.

अमला का भारतीय टीम पर हमला 

कोलकाता टेस्ट के  पांचवें दिन का तनाव महसूस किया जा सकता था.  भारत जीत के लिए जोर लगा रहा था, जबकि हाशिम अमला जिन्होंने दोनों पारियों में शानदार शतक जमाए  एक दृढ़ संघर्ष कर रहे थे. अमला ने इस टेस्ट को बचाने के लिए दूसरी पारी में 394 गेंद खेली थी.  उनके साथ थे भारत के मौजूदा गेंदबाजी कोच, मॉर्ने मॉर्कल उन्होंने 76 मिनट तक बल्लेबाज़ी की और 60 गेंदें खेलीं.  समय निकलता जा रहा था, और भारतीय खिलाड़ी बेचैन हो रहे थे. सब कुछ दांव पर था.  दर्शक भी टीम के साथ खड़े थे, हर अपील पर स्टेडियम गूंज उठता था. तभी हरभजन सिंह, जो मैच के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ों में से एक थे, को हाई कोर्ट एंड से गेंदबाजी के लिए वापस बुलाया गया.

हरभजन -जहीर का हल्लाबोल

यह एक शानदार टेस्ट मैच था और भारतीय दृष्टिकोण से लगभग परफेक्ट खेल. दक्षिण अफ्रीका को 218-1 से 296 पर समेट देना काबिल-ए-तारीफ था.  ज़हीर ख़ान और हरभजन सिंह दोनों ही शानदार रहे.  बल्लेबाज़ी में भारत ने 643 रन बनाए  जिसमें कई भारतीयों ने शतक जमाए,सहवाग, सचिन, लक्ष्मण धोनी सबने बहती गंगा में हाथ धोया.  और दर्शकों को भरपूर मनोरंजन मिला सच कहें तो, हर भारतीय प्रशंसक चाहेगा कि आने वाले दिनों में हमें फिर से ऐसा ही मैच देखने को मिले. जहां क्रिकेट का रोमांच बार बार अपनी चरम की तरफ जाए .

प्रेस बाक्स में छटपटाहट

मैच के दौरान ईडेन गार्डेंस का प्रेस बाक्स जो बिल्कुल सेंटर विकेट के सामने था तनाव के दौर से गुजर रहा था. हर कोई अपनी सीट बदल रहा था, मेरे मामले में, जिस टीवी चैनल से मैं जुड़ा था, उसने कुछ अलग किया उन्होंने मुझे लाइव कॉल पर जोड़ा हुआ था ताकि जैसे ही आखिरी विकेट गिरे, मैं खुशी से चिल्ला उठूँ. भज्जी ने मॉर्कल को एलबीडब्ल्यू आउट किया, और हम सब खुशी से झूम उठे. भारत ने नंबर 1 का ताज बचा लिया था, और एक ऐतिहासिक टेस्ट जीत लिया था.  मैं जितनी तेजी के लिए लाइव देने के लिए बाहर भागा वो आज भी मुझे याद है.



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