Wildlife: एक मां कर रही 132 बच्चों की देखभाल! MP के सोन घड़ियाल अभयारण्य में अनोखा नजारा, देखें तस्वीरें

Wildlife: एक मां कर रही 132 बच्चों की देखभाल! MP के सोन घड़ियाल अभयारण्य में अनोखा नजारा, देखें तस्वीरें


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MP Son Gharial Sanctuary: मध्य प्रदेश के सीधी जिले में स्थित संजय दुबरी राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य अब सिर्फ टाइगर ही नहीं, बल्कि घड़ियालों के लिए भी मशहूर हो गया है. सर्द धूप में नदी किनारे घड़ियालों को सुस्ताते देख सैलानी बेहद उत्साहित नजर आ रहे हैं. सबसे खास नजारा यहां एक मादा घड़ियाल का है…

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में स्थित सोन घड़ियाल अभयारण्य इन दिनों सुर्खियों में है. यहां हाल ही में चंबल नदी से एक विशालकाय नर घड़ियाल लाया गया है, जिसने अभयारण्य के जलीय जीवन में नई ऊर्जा भर दी है.

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वन विभाग के डीएफओ के अनुसार, इस नर घड़ियाल की लंबाई करीब 4.10 मीटर और वजन 2 से 3 क्विंटल है. इसकी औसतन उम्र 15 से 20 वर्ष बताई जा रही है. जब इसे सोन नदी में छोड़ा गया, तो उसने तेज़ी से पानी में छलांग लगाई और गहराइयों में समा गया, मानो यह उसकी नई दुनिया हो.

Chambal

यह घड़ियाल जनवरी 2025 में चंबल से लाया गया था. इसके आने के कुछ ही महीनों में अभयारण्य में बड़ा बदलाव देखने को मिला. पांच मादा घड़ियालों ने अंडे दिए, जिनसे मार्च 2025 में कुल 132 नन्हे घड़ियालों का जन्म हुआ.

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वन विभाग के डीएफओ के मुताबिक, अब इन सभी नन्हे घड़ियालों की देखरेख एक ही मादा घड़ियाल कर रही है. यह दृश्य न केवल अनोखा है, बल्कि घड़ियालों के सामाजिक व्यवहार को समझने के लिए वैज्ञानिक रूप से भी बेहद रोचक माना जा रहा है.

Son Gharial

सोन घड़ियाल अभयारण्य की स्थापना वर्ष 1981 में घड़ियालों और अन्य जलीय जीवों के संरक्षण के उद्देश्य से की गई थी. यह अभयारण्य मध्य प्रदेश के सीधी और शहडोल जिलों में फैला है और संजय टाइगर रिजर्व का हिस्सा है.

Gharial

यह अभयारण्य 210 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें सोन नदी का 161 किमी, बनास नदी का 23 किमी और गोपद नदी का 26 किमी हिस्सा शामिल है. यह क्षेत्र घड़ियालों, कछुओं और अन्य दुर्लभ जलीय जीवों के लिए प्राकृतिक आश्रय स्थल है.

Son River

यहां घड़ियालों के अलावा भारतीय नरम खोल कछुआ (Chitra Indica), भारतीय स्किमर और कई अन्य संकटग्रस्त जीव भी पाए जाते हैं. सोन नदी की स्वच्छ जलधारा और शांत वातावरण इन जीवों के लिए आदर्श आवास प्रदान करता है.

gharial

वन विभाग के डीएफओ के मुताबिक, नन्हे घड़ियालों की सुरक्षा और उनके विकास की लगातार निगरानी की जा रही है. डीएफओ का कहना है कि यह घटना घड़ियाल संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता है और इससे सोन नदी का पारिस्थितिकी तंत्र फिर से जीवंत हो उठा है.

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एक मां कर रही 132 बच्चों की देखभाल! MP के सोन घड़ियाल अभयारण्य में अनोखा नजारा



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