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नगर परिषद क्षेत्र में सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। वार्ड क्रमांक 4 की पार्षद प्रतिनिधि कमल गौर ने अपने ही वार्ड में बनी सड़क को लेकर सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की है। उन्होंने ठेकेदार के साथ परिषद के अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
करीब दो साल पहले कायाकल्प योजना के तहत वार्ड क्रमांक 4 में 400 मीटर लंबी सड़क बनाई गई थी। इस पर 52 लाख रुपए खर्च हुए। निर्माण की शुरुआत से ही काम विवादों में रहा। कमल गौर ने बताया कि निर्माण के दौरान कई बार घटिया सामग्री के इस्तेमाल की शिकायत की गई। परिषद के इंजीनियर और कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। कई बार ठेकेदार से बहस भी हुई। इसके बावजूद ठेकेदार ने अधूरा और खराब गुणवत्ता वाला काम पूरा कर दिया।
कमल गौर ने कहा कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से कहा था कि जब तक सड़क सही तरीके से नहीं बनती, ठेकेदार का भुगतान रोका जाए। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी ने घटिया निर्माण देखकर भी ठेकेदार का पूरा भुगतान पास कर दिया।
52 लाख से बनी सड़क दो साल के भीतर ही उखड़कर खराब हुई उन्होंने कहा, “मुझे ठेकेदार या परिषद से नहीं, बल्कि उस व्यक्ति से शिकायत है जिसने इस घटिया निर्माण को संतुष्ट बताकर लाखों का नुकसान करा दिया।” पार्षद प्रतिनिधि का कहना है कि निर्माण के पहले दिन से ही घटिया रेत, अधूरी रोलिंग और बारिश के बीच सड़क डालने जैसी अनियमितताएं की गईं। नतीजा यह हुआ कि 52 लाख की लागत से बनी यह सड़क दो साल के भीतर ही उखड़कर खराब हो चुकी है। कमल गौर ने बताया कि उनकी शिकायत पर जांच आने से पहले ही परिषद द्वारा सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत क्रमांक 34892284 में “संतुष्टि पूर्ण” का जवाब भेज दिया गया, जो खुद एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि यदि ईमानदारी से जांच की जाए तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के बीच मिलीभगत साफ सामने आ जाएगी।