सरकार को जहां भी महामंडलेश्वर लोग बनाना है हम साथ देंगे, लेकिन हम हमारी जन्मभूमि नहीं छोड़ेंगे। रात के 3-4 बजे जब सब सो रहे होते है, तब प्रशासन अंधेरे में आकर सर्वे का काम करती है। ये कैसा प्रशासन और सरकार है।
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ये कहना है ओंकारेश्वर के ब्रह्मपुरी क्षेत्र की सुनीता रावत का। इसी विरोध के साथ ब्रह्मपुरी के स्थानीय लोग धरने पर बैठे हैं। ओंकारेश्वर में अभी लॉकडाउन जैसे हालात बन गए हैं। सोमवार सुबह से होटल-रेस्टोरेंट से लेकर चाय और नाश्ते तक की दुकानें नहीं खुली। ऑटो-टैक्सी से लेकर नर्मदा में नौका विहार जैसी सेवाएं तक ठप रही। ऐसा अगले तीन दिन तक चलेने की संभावना है।
दैनिक भास्कर की टीम मौजूदा हाल जानने के लिए ग्राउंड पर पहुंची। इस रिपोर्ट में पढ़िए ओंकारेश्वर में स्थानीय लोग क्यों हैं विरोध में…
तीर्थनगरी के लोग सरकार के 120 करोड़ की प्रस्तावित ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने ममलेश्वर लोक का सर्वे शुरू किया, जिसमें सैकड़ों मकान, दुकानें, आश्रम, मठ और प्राचीन संरचनाएं शामिल की गई हैं। प्रोजेक्ट से हजारों लोग प्रभावित होंगे।
मंदिर से सटे ब्रह्मपुरी क्षेत्र के लोगों को विस्थापित करने का प्लान है।
स्थानीय विधायक और जनप्रतिनिधियों का घेराव कर चुके नगरवासियों ने अब आंदोलन का रास्ता चुन लिया है। जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी मुलाकात की लेकिन, कोई बात नहीं पाई। दो दिन पहले सांसद ने अफसरों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक ली थी। इस दौरान कलेक्टर ने साफ तौर पर कहा था कि सिंहस्थ से पहले ममलेश्वर मंदिर क्षेत्र का विस्तार के साथ विकास होना है। अब श्रद्धालुओं की तादाद बढ़ने लगी है, इसलिए यह अति-आवश्यक है। सर्वे कार्य को रोकना उचित नहीं है, जो लोग भी प्रभावित होंगे, उन्हें दुकान, मकान के बदले तीर्थ क्षेत्र में ही दूसरी जगह विस्थापित किया जाएगा।
चाय-पानी को तरसे, होटल भी नहीं मिले
दैनिक भास्कर की टीम लोगों के तीन दिन के विरोध आह्वान के बाद सोमवार सुबह ओंकारेश्वर पहुंची। यहां मार्केट पूरी तरह बंद था। हर शटर पर ताले लटके हुई थे। होटलों पर नो बुकिंग बताया जा रहा था। वहीं मंदिर किनारे पूजन की सामाग्री की दुकान भी नहीं खुली। वहीं रोज घाट किनारे फूल-पत्ती और पूजा सामग्री बेचने वाले भी आज नदारद थे।
ओंकारेश्वर दर्शन के लिए ग्वालियर से आए राजवीर सिंह ने बताया कि उन्हें पहले तो बस स्टैंड से मंदिर तक जाने के लिए कोई टैक्सी नहीं मिली। फिर चाय-पानी के लिए भी तरस गए। कोई होटल, रेस्टोरेंट नहीं खुला था। साथ में बच्चे थे, जो रोने लग गए, ऐसे में सनावद में रहने वाले एक रिश्तेदार से संपर्क किया। उनसे बात की फिर वे सनावद से फल-फ्रूट और पानी की बोतल लेकर आए। इस तरह हमने भूख-प्यास मिटाई।

ओंकारेश्वर में होटल और चाय के दुकान बंद है।
189 मकान,184 दुकानें, 34 आश्रम-होटल टूटेंगे
सरकार ने ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर में विस्तार की जगह कम होने से ममलेश्वर लोक निर्माण की मंजूरी दी थी। ममलेश्वर लोक में ब्रह्मपुरी घाट, रोड से लेकर गजानंद आश्रम, झूलापुल से गोमुख घाट, काशी विश्वनाथ मंदिर से जूना अखाड़ा का क्षेत्र शामिल किया है। इस क्षेत्र में आने वाले पक्के मकान और दुकानों को हटाया जाएगा।
ममलेश्वर लोक निर्माण के सरकारी सर्वे में 189 मकान, 184 दुकानें, आश्रम 10, गेस्ट हाउस 15, धर्मशालाएं 9 सहित प्राचीन मंदिरों और मठों के चबूतरे व आश्रम भी आ रहे हैं। रहवासियों के मुताबिक, ओंकारेश्वर में ब्रह्मपुरी क्षेत्र का 1954 के सरकारी रिकार्ड में जिक्र है। यह ओंकारेश्वर की सबसे पुरानी बस्ती है। 1954 में यहां पर 24 मकानों के बने होने का भी जिक्र है।

लोगों का कहना है कि ये छोटी गलियां की ओंकारेश्वर की पहचान है, जिसे खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
सरकार का वादा- जमीन की जगह दूसरी जमीन देंगे
सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, कलेक्टर ऋषव गुप्ता और क्षेत्र के विधायक नारायण पटेल की मौजूदगी में बैठक हुई तो स्पष्ट रूप से कहा गया कि ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट बनकर रहेगा, लोगों को विस्थापित होना होगा। दुकान और मकानों का सर्वे होगा, मुआवजे की बजाय लोगों को स्थान दिया जाएगा, प्रोजेक्ट में जो मार्केट बनेगा, उनमें विस्थापितों को प्राथमिकता दी जाएगी। विस्थापन और नये स्थान के आंवटन के दौरान रहवासी किराये के मकानों में रहेंगे, उसका भुगतान भी सरकार करेगी। जब बैठक में शामिल कुछ अधिकारी ओंकारेश्वर पहुंचे तो उन्होंने लोगों के समक्ष सरकार की मंशा रखी। इस पर लोग आक्रोशित हो गए और अब तीन दिन के लिए बंद का ऐलान कर दिया।

ब्रह्मपुरी की शीतल उपाध्याय कहती है कि हमें हमारी ब्रह्मपुरी छोड़कर नहीं जाना है। ब्रह्मपुरी मंदिर के पीछे बहुत जगह पड़ी हुई है। इससे डबल जमीन वहां पर है। सरकार वो जमीन ले लें। सरकार को केवल ब्रह्मपुरी क्षेत्र ही क्यों चाहिए। इसका जवाब दें। हमारे परिवार वाले मासिक तौर पर डिस्टर्ब होने लगे है। आज हमें कुछ हो जाएगा तो क्या सरकार उन बच्चों का पालनपोषण करेगी।

4.6 हेक्टेयर में 120 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट
ओंकारेश्वर में 4.6 हेक्टेयर में 120 करोड़ की लागत से ममलेश्वर लोक का निर्माण होगा। जिसके लिए सर्वे का काम पूरा हो चुका है। सिंहस्थ के आयोजन को ढ़ाई साल का समय बाकी है। ऐसे में दिसंबर 2027 तक निर्माण काम को पूरा करने की शासन ने डेडलाइन तय की है। इसी साल जमीन के समतलीकरण के टेंडर लगना है, जिसके लिए प्रशासन जोर-शोर से तैयारी में लगा है कि हर हाल में लोग विस्थापन के लिए राजी हो और बगैर किसी विवाद के विस्थापन हो जाए। अन्यथा नोटिस देकर समय देंगे और कार्रवाई करेंगे।