किसान संघ का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री के बुलावे पर उज्जैन से भोपाल आया था।
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच मोहन सरकार ने उज्जैन में लैंड पूलिंग एक्ट लागू नहीं होगा। किसानों और भारतीय किसान संघ के लगातार विरोध के बाद सरकार ने यह योजना पूरी तरह वापस ले ली है। इसका सीधा मतलब ये है कि किसी भी किसान की जमीन का स्थायी अधिग्रहण न
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सरकार ने कहा कि लैंड पूलिंग के तहत खेत या भूमि का स्थायी कब्जा नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा प्लॉट बांटने, भूमि पुनर्व्यवस्था या दीर्घकालीन कब्जे की प्रक्रिया नहीं चलेगी। वहीं, प्रस्तावित ‘स्पिरिचुअल सिटी’ के लिए बड़े पैमाने पर भूमि लेने की योजना भी रोकी गई है। यही वह प्रक्रिया थी जिसके खिलाफ किसान कई महीनों से विरोध कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार रात को भोपाल में किसान संघ, बीजेपी पदाधिकारियों और उज्जैन प्रशासन के साथ बैठक के बाद यह फैसला लिया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ का आयोजन दिव्य, भव्य और विश्वस्तरीय होगा। साधु-संतों और किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
बैठक में यह भी तय हुआ कि लैंड पूलिंग को निरस्त करने के आदेश फौरन जारी किए जाएं। बैठक में बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, किसान संघ के महेश चौधरी, कमल सिंह आंजना मौजूद रहे। बता दें, आज (18 नवंबर) भारतीय किसान संघ ‘डेरा डालो घेरा डालो’ आंदोलन करने वाला था।
लैंड पूलिंग एक्ट को लेकर किसान संघ के पदाधिकारियों की मुलाकात के बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी CM हाउस पहुंचीं। उमा और CM मोहन यादव के बीच करीब आधे घंटे तक चर्चा हुई।
सोमवार रात किसान संघ के पदाधिकारियों से सीएम ने भोपाल में मुलाकात की।
4 पॉइंट में जानिए फैसले के बाद निर्माण में क्या बदलेगा?
1. सड़क-सीवरेज जैसे जरूरी काम होते रहेंगे किसानों की सहमति से जैसे बाकी जगह जमीन अधिग्रहण करते हैं, वैसे ही काम होगा। सिंहस्थ में अब ढाई साल ही बचे हैं। इसलिए अभी सिर्फ सड़क-सीवरेज जैसे जरूरी काम ही आगे बढ़ेंगे। ताकि सिंहस्थ जैसी कोई परेशानी न हो।
- अब 2378 हैक्टेयर भूमि मेला क्षेत्र में अस्थाई निर्माण ही होंगे। किसी भी तरह का पक्का निर्माण नहीं किया जाएगा। लैंड पूलिंग एक्ट के हिसाब से मेला क्षेत्र में किसान की जमीन 50 प्रतिशत भूमि विकसित कर बाकी 50 प्रतिशत जमीन सरकार ले सकती थी, जिसका किसान विरोध कर रहे थे।
- सहमति के बाद अब जहां किसानों की जमीन लेंगे, अगर वहां फसल लगी हो तो उसे साल भर के किराए का भुगतान किया जाएगा।
2. अब जमीन सिंहस्थ एक्ट के जरिए लेंगे, फिर लौटाएंगे सरकार ने स्पष्ट किया है कि जमीन सिर्फ सिंहस्थ एक्ट के तहत अस्थायी रूप से ली जाएगी, जैसे हर 12 साल में आयोजन के समय लिया जाता है। सिंहस्थ एक्ट के अनुसार, जमीन केवल आयोजन अवधि के लिए उपयोग में रहती है। आयोजन खत्म होते ही भूमि मूल मालिक को लौटा दी जाती है। जमीन का मालिकाना हक किसान के पास ही रहता है। यह मॉडल दशकों से उज्जैन में लागू है।
3. पहले कलेक्टर गाइडलाइन रेट पर जमीन मिलती, अब नहीं लैंड पूलिंग में सरकार को कलेक्टर गाइडलाइन की रेट पर ही जमीन मिल जाती। अब जमीन भूमि अधिग्रहण के जरिए ली जाएगी। अब जो भी काम होगा, वह भूमि अधिग्रहण के जरिए होगा। इसमें सरकार कलेक्टर गाइडलाइन के दोगुने दाम देगी।
4. मेला क्षेत्र में प्रस्तावित 50 किमी की सड़क का बनना तय सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 50 किलोमीटर की पक्की सड़क भी प्रस्तावित है। इसका बनना तय है, क्योंकि इस पर किसान भी सहमत हैं। इसका रूट भी तय हो चुका है। अंतर इतना है कि अब इसके लिए जमीन, लैंड पूलिंग की बजाय अधिग्रहण के जरिए ली जाएगी।
इसके अलावा बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का काम तभी होगा, जब किसान इस पर सहमति दें। सूत्रों के मुताबिक अब फोकस मौजूदा सरकारी भूमि, अस्थायी ढांचों, पुनर्व्यवस्थित यातायात मार्गों पर रहेगा, ताकि बिना विवाद के सिंहस्थ की तैयारियां पूरी की जा सकें।

गृह मंत्री अमित शाह ने भी देखा था प्रजेंटेशन भारतीय किसान संघ की शिकायत पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने भी जानकारी ली थी। शाह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन की मौजूदगी में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का प्रजेंटेशन देखा था।
दरअसल, सिंहस्थ के लिए उज्जैन में 2 हजार 376 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना था। इसमें किसान स्थायी निर्माण का विरोध कर रहे थे।

आज होने वाला आंदोलन स्थगित, अब रैली ही निकलेगी भारतीय किसान संघ की ओर से बताया गया है कि आज (18 नवंबर) होने वाला प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने लैंड पूलिंग एक्ट को खत्म कर दिया है। अब कम संख्या में किसान एक रैली ही निकालेंगे।
संघ की ओर से बताया गया कि सरकार के पास आ रही इंटेलिजेंस की रिपोर्ट ने सरकार को हिलाकर रख दिया था। जिसके बाद उज्जैन में अव्यवस्था भी फैल सकती थी। इसलिए सरकार ने अपना फैसले ही बदल दिया है।
सिंघार बोले- सिंहस्थ लैंड पूलिंग पर किसानों की जीत सिंहस्थ लैंड पूलिंग एक्ट निरस्त किए जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अपने X अकाउंट पर लिखा- उज्जैन के किसानों की ज़मीन छीनने की कोशिश के खिलाफ जबरदस्त जनविरोध के बाद आखिरकार सरकार को पीछे हटना पड़ा। हमने शुरुआत से कहा था कि किसानों पर अन्याय करोगे तो जवाब देना पड़ेगा। आज वही हुआ। सरकार को लैंड पूलिंग नीति निरस्त करनी पड़ी।

पानी में खड़े होकर किसानों का प्रदर्शन किया था स्थायी कुंभ नगरी बनाने का विरोध करते हुए तीन महीने पहले किसानों ने चक्रतीर्थ श्मशान घाट में पानी में खड़े होकर प्रदर्शन किया था। आगर रोड पर चक्काजाम भी किया था। किसान सिंहस्थ के लिए स्थायी रूप से जमीन देने को तैयार नहीं हो रहे थे। वे जमीन अधिग्रहण पुरानी योजना के तहत करने की मांग कर रहे थे।

किसानों ने श्मशान घाट में पानी में खड़े होकर प्रदर्शन किया था।
जानिए क्या थी 2000 करोड़ रुपए की योजना? सीएम मोहन यादव ने सिंहस्थ 2028 को देखते हुए सिंहस्थ मेला क्षेत्र को विकसित करने का प्लान तैयार किया था। मंशा ये था कि हर 12 साल में करोड़ों रुपए खर्च कर अस्थायी निर्माण नहीं बनाने पड़ेंगे। इसकी जगह स्थायी निर्माण किए जाएंगे। उज्जैन विकास प्राधिकरण इसके लिए 1806 किसानों की करीब 5000 सर्वे वाली जमीन की लैंड पूलिंग करने वाला था।
ऐसा पहली बार हो रहा था जब सिंहस्थ भूमि पर स्थायी सड़कें, बिजली के पोल और अन्य निर्माण कार्य किए जाने थे। इतने बड़े क्षेत्र में 60 से 200 फीट तक की सड़कें बनतीं जो इंटर कनेक्ट होतीं।
इससे समय रहते भीड़ बढ़ने पर क्राउड को शिफ्ट किया जा सकता था। मध्यप्रदेश में इस तरह की यह पहली योजना थी, जिस पर करीब 2000 करोड़ रुपए का खर्च का अनुमान था।