बालाघाट। वारासिवनी के शंकर साव पटेल शासकीय महाविद्यालय में ‘एक देश-एक चुनाव’ विषय पर छात्र संवाद का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्र-छात्राओं की उपस्थिति में देश में लोकसभा और राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई
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कार्यक्रम के मुख्य वक्ता निशांत बिसेन ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद लगभग दो दशकों तक देश में एक साथ चुनाव होते थे, लेकिन राज्यों में सरकारों के समय से पहले गिरने या विधानसभाओं के भंग होने के कारण यह चक्र बाधित हो गया। इसी वजह से वर्तमान में अलग-अलग चुनाव का स्वरूप सामने आया है।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार एक बार फिर एक साथ चुनाव कराने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। मौजूदा केंद्र सरकार ने लोकसभा में इससे संबंधित संशोधन विधेयक पेश किया है, जिसे अब संयुक्त संसदीय समिति के पास चर्चा के लिए भेजा गया है। संभावना है कि ये बिल 2026 में दोबारा लोकसभा में पेश किए जाएंगे।
बिसेन ने आगे बताया कि यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो देश 2029 या 2034 में एक साथ चुनाव के लिए तैयार हो सकता है। इसी विचार को युवाओं तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह छात्र संवाद आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदीप जायसवाल ने कहा कि चुनाव लोकतंत्र की आत्मा हैं और प्रत्येक मतदान लोकतंत्र को और मजबूत करता है। उन्होंने स्वीकार किया कि बार-बार होने वाले चुनावों से भारतीय लोकतंत्र के सामने कुछ चुनौतियां भी खड़ी होती हैं, जिनका समाधान देश की जनता के साथ संवाद के माध्यम से खोजा जा सकता है। उन्होंने ‘एक देश, एक चुनाव’ को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए सभी से इस पर अपने सुझाव देने का आग्रह किया।
संयोजक प्रफुल बिसेन ने युवाओं से सोशल मीडिया पर इस मुहिम से जुड़ने और इसका समर्थन करने की अपील की।
संवाद के दौरान, एलएलबी छात्र फराहन खान ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न पूछा। उन्होंने जानना चाहा कि यदि ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ के तहत चुनाव होते हैं और कुछ समय बाद किसी राज्य की सरकार गिर जाती है, तो क्या उस स्थिति में फिर से चुनाव होंगे या नहीं?

मुख्य वक्ता ने बताया कि संयुक्त संसंदीय समिति, इसको लेकर कोई ना कोई समाधान खोजेगी। जिला सहसंयोजक अवलेश पारधी ने छात्रों को बताया कि आप आने वाले समय में भारत का भविष्य है और आपके कंधों पर बड़ी जिम्मेदारियां होगी। इसलिए वन नेशन-वन इलेक्शन की अवधारणा पर विचार कर अपने विचार सोशल मिडिया पर जरूर साझा करे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. गेडाम बताया कि वन नेशन-वन इलेक्शन की अवधारणा आने वाले समय मे निश्चित रूप से कारगर सिद्ध होगी।