सफलता कभी एक रात में नहीं मिलती, इसके पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास का लंबा सफर छिपा होता है. खंडवा जिले के बड़गांव गुर्जर के रहने वाले सारंग चौधरी इसकी जीती-जागती मिसाल हैं. किसान परिवार में जन्मे सारंग ने अपने सपनों को खेतों की मिट्टी में दबने नहीं दिया, बल्कि उसी मिट्टी से सीख लेकर अपनी पहचान बनाई. आज वे MPPSC 2022 में राजनीति विज्ञान विषय से असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयनित हो चुके हैं. यह उपलब्धि केवल एक पद नहीं, बल्कि उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयासों का परिणाम है.
सारंग का बचपन साधारण था. उनके पिताजी खेती करते हैं और आर्थिक स्थिति हमेशा मजबूत नहीं रही. फिर भी माता-पिता ने कभी अपने बच्चों की पढ़ाई में कमी नहीं आने दी. सारंग भी बचपन से मेहनती और पढ़ाई में होशियार रहे. उन्होंने अपनी शिक्षा खंडवा के उत्कृष्ट विद्यालय (एक्सीलेंस स्कूल) से पूरी की, जहां पढ़ाई का माहौल और शिक्षकों का सहयोग उन्हें हमेशा प्रेरित करता रहा. ग्रामीण परिवेश में रहने के कारण उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. पढ़ाई की सुविधाएं सीमित थीं, लेकिन सारंग ने कभी इसे कमजोरी नहीं बनने दिया. वे रोज खेतों में पिता का हाथ बंटाते और समय बचाकर पढ़ाई करते थे. यही अनुशासन और संघर्ष आगे चलकर उनकी सफलता की मजबूत नींव बना.
साल 2021 सारंग के जीवन में अहम मोड़ लेकर आया. उन्होंने एमए (पॉलिटिकल साइंस) पूरी की और उसी वर्ष NET और JRF दोनों परीक्षाएं क्वालीफाई कर लीं. यह उपलब्धि उनके भीतर एक नई ऊर्जा भर गई. इसी दौरान वे शिक्षण कार्य से भी जुड़े रहे, जिससे न सिर्फ उनका अनुभव बढ़ा बल्कि विषय की समझ भी गहरी होती चली गई.
इसके बाद उन्हें पता चला कि MPPSC ने असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए वैकेंसी निकाली है. उन्होंने तुरंत निर्णय लिया कि यही वह मौका है जिसे उन्हें पकड़ना है. वर्ष 2021 से उन्होंने इस परीक्षा की गंभीर तैयारी शुरू की. लगभग डेढ़ साल लगातार तैयारी करते हुए उन्होंने कठिन टॉपिक्स को गूगल से पढ़ा, कई बुक्स का सहारा लिया और जरूरत पड़ने पर खुद के नोट्स तैयार किए. वे कहते हैं कि “कुछ टॉपिक किताबों में भी नहीं मिलते, न ही यूट्यूब पर, इसलिए मुझे खुद खोजकर पढ़ना पड़ा.”
सारंग ने इस दौरान अपना समय प्रबंधन बेहद समझदारी से किया. वे पीथमपुर-राऊ क्षेत्र में रहकर पढ़ाई करते रहे. परिवार से दूर रहना कभी-कभी मुश्किल होता था, लेकिन लक्ष्य बड़ा था, इसलिए मन को मजबूत रखना पड़ा.
MPPSC की असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में लिखित परीक्षा क्वालीफाई करने के बाद उनका इंटरव्यू हुआ. सारंग बताते हैं कि इससे पहले वे तीन बार MPPSC के इंटरव्यू दे चुके थे, जिससे उन्हें इंटरव्यू पैटर्न की समझ पहले से ही अच्छी थी. इस अनुभव ने उनके आत्मविश्वास में चार चांद लगा दिए.
वे बताते हैं कि तैयारी के कठिन समय में कई बार मन टूटता था, हार मानने जैसा भी लगता था. लेकिन हर बार उनके माता-पिता, पत्नी और दोस्तों ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया. वे कहते हैं “जब भी मैं डिमोटिवेट होता था, परिवार से बात करता, दोस्तों के साथ थोड़ा घूम लेता, और फिर नई ऊर्जा के साथ पढ़ाई में जुट जाता था.”
सारंग का मानना है कि अगर कोई लक्ष्य स्पष्ट हो तो आधी लड़ाई वहीं जीत ली जाती है. फिर चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, निरंतर मेहनत से सफलता जरूर मिलती है. वे कहते हैं कि अगर आप अपने मन में ठान लें कि आपको यह करना है, तो कोई भी चीज आपको रोक नहीं सकती. बस पढ़ाई में निरंतरता जरूरी है.
सारंग अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और पत्नी को देते हैं. नए-नवेले शादीशुदा जीवन के बावजूद उनकी पत्नी ने हर कदम पर उनका साथ निभाया और तनाव के समय में उनका मनोबल बढ़ाया.
आज किसान परिवार का यह बेटा असिस्टेंट प्रोफेसर बनकर न केवल अपने परिवार का सपना पूरा किया है बल्कि उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बन चुका है, जो साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं और बड़ा मुकाम हासिल करने की तमन्ना रखते हैं.